सेक्शन प्रभारी बोले , दुकानों की संख्या की जानकारी नहीं, रेंजर ने जांच कर कार्रवाई का दिया भरोसा
हर्षोदय टाइम्स ब्यूरो
महराजगंज। सोहगी बरवा वन्यजीव प्रभाग के पकड़ी वन रेंज के कटहरा सेक्शन में संचालित फर्नीचर दुकानों को लेकर वन विभाग की निगरानी व्यवस्था सवालों के घेरे में है। क्षेत्र में बिना लाइसेंस एवं बिना पंजीकरण के कई फर्नीचर दुकानें संचालित होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। साथ ही इनमें अवैध रूप से काटी गई लकड़ियों के इस्तेमाल की भी आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ओर सरकार व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाकर हरित क्षेत्र बढ़ाने का प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में लकड़ी के कथित अवैध कारोबार पर प्रभावी निगरानी नहीं दिखाई दे रही है। आरोप है कि कटहरा खास समेत आसपास के गांवों में बड़ी संख्या में फर्नीचर दुकानें संचालित हैं, लेकिन उनके लाइसेंस, पंजीकरण और लकड़ी के स्रोत की नियमित जांच नहीं हो रही है।
सूत्रों के अनुसार, पहले करीब 24 दुकानों का पंजीकरण हुआ था, जबकि वर्तमान में इनकी संख्या इससे अधिक बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का दावा है कि कई दुकानों के दस्तावेजों का वर्षों से सत्यापन नहीं कराया गया, जिससे निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
जब इस संबंध में कटहरा सेक्शन प्रभारी एवं डिप्टी रेंजर रामानंद मौर्य से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें अपने सेक्टर में संचालित दुकानों की कुल संख्या की जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि दुकानों का पंजीकरण एवं सत्यापन वन प्रभाग कार्यालय स्तर से कराया जाता है।
सेक्शन प्रभारी के इस बयान के बाद स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं कि यदि क्षेत्रीय अधिकारी को अपने कार्यक्षेत्र में संचालित दुकानों की संख्या तक ज्ञात नहीं है, तो नियमित निरीक्षण और निगरानी की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
इसी बीच कुछ स्थानीय सूत्रों ने यह भी आरोप लगाया कि दुकानदारों से सत्यापन के नाम पर हर माह 500 से 1000 रुपये तक की अवैध वसूली की जाती है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और वन विभाग की ओर से भी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
वन विभाग की कार्यप्रणाली और क्षेत्रीय निरीक्षण व्यवस्था को लेकर भी लोगों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि समय-समय पर दुकानों का सत्यापन और लकड़ी के स्रोत की जांच होने से अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
उधर, क्षेत्रीय वनाधिकारी (रेंजर) सुशांत मणि त्रिपाठी ने कहा कि मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों से ली जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वन विभाग जांच के बाद क्षेत्र में संचालित फर्नीचर दुकानों के लाइसेंस, पंजीकरण और लकड़ी के स्रोत की पड़ताल कर क्या कदम उठाता है।

