आवास के इंतजार में बीता एक कार्यकाल, उम्मीदें फिर भी अधूरी
लक्ष्मीपुर खास की बेबस साबरुन आज भी आवास से वंचित, सरकारी दावे बेअसर
हर्षोदय टाइम्स ब्यूरो
महराजगंज। घुघली ब्लॉक के लक्ष्मीपुर खास पंचायत में रहने वाली गरीब महिला साबरुन पत्नी रईस वर्षों से पक्का मकान मिलने की उम्मीद में सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन नतीजा आज तक शून्य ही है। प्रधान से लेकर ब्लॉक कार्यालय तक कई बार आवेदन देने के बावजूद उनका नाम आवास सूची में शामिल नहीं किया गया, जिसके चलते वह आज भी फूस की झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं।
साबरुन बताती हैं कि पूर्व प्रधानी कार्यकाल के दौरान भी उन्होंने आवास स्वीकृति को लेकर कई बार गुहार लगाई, मगर उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला। नया कार्यकाल शुरू होने के बाद भी हालात में बदलाव नहीं आया, जबकि हर बारिश, ठंड और गर्मी में झोपड़ी की हालत उनसे और उनके बच्चे से संघर्ष कराती रही। उनके अनुसार अधिकारी और पंचायत प्रतिनिधि कागजों में कार्यवाही पूरी कर देते हैं, लेकिन वास्तविक मदद अब तक नहीं मिली।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में कई पात्र गरीब परिवार आवास जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं, जबकि कुछ अपात्र व्यक्ति लाभ उठा चुके हैं। इससे योजनाओं की पारदर्शिता और चयन प्रक्रिया पर सवाल उठने स्वाभाविक हैं। स्थानीय लोगों का स्पष्ट आरोप है कि आवास आवंटन में पात्रता की जगह पक्षपात और दबाव प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।
फूस की मड़ई में रोजमर्रा की जिंदगी गुजार रही साबरुन का परिवार यह संदेश देता है कि सरकारी योजनाएं भले ही कागजों और मंचों पर चकाचौंध करती हों, पर उसकी असल रोशनी अब भी गरीबों की झोपड़ियों तक नहीं पहुंच सकी है। पंचायत में विकास के दावे और जमीन की हकीकत में दिखाई दे रही यह खाई प्रशासन के लिए बड़ा सवाल बनकर उभर रही है।

