बिना लाइसेंस पनीर बिक्री पर सवाल, कार्रवाई के बाद फिर खुली दुकान

उत्तर प्रदेश महाराजगंज


एफएसडीए की जांच के बावजूद बागापार चौराहे पर दोबारा शुरू हुआ कारोबार, स्थानीय लोगों ने मांगा विभाग से जवाब


हर्षोदय टाइम्स ब्यूरो


महराजगंज। कोतवाली क्षेत्र के ग्राम सभा बागापार चौराहे पर बिना खाद्य लाइसेंस संचालित पनीर की दुकान एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की कार्रवाई के कुछ समय बाद ही दुकान दोबारा खुलने से स्थानीय लोगों ने विभागीय कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं।


जानकारी के अनुसार, शुक्रवार की शाम खाद्य सुरक्षा अधिकारी हिमांशु जैन के नेतृत्व में एफएसडीए की टीम ने राजेश मौर्य की पनीर दुकान पर छापेमारी कर पनीर का नमूना जांच के लिए लिया था। निरीक्षण के दौरान दुकान संचालक वैध खाद्य लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर सका था। विभाग ने मौके पर इसकी पुष्टि करते हुए नमूना प्रयोगशाला भेजा था और रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की बात कही थी।


जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी कृष्ण कुमार उपाध्याय ने भी स्पष्ट किया था कि जांच के दौरान दुकान का कोई खाद्य लाइसेंस नहीं मिला। उन्होंने बताया था कि नमूने की जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।


इधर, विभागीय जांच के कुछ ही समय बाद संबंधित दुकान के फिर से खुल जाने से लोगों के बीच कई सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि दुकान बिना लाइसेंस संचालित पाई गई थी, तो दोबारा कारोबार किस आधार पर शुरू हुआ। क्या दुकान संचालक ने इस बीच आवश्यक लाइसेंस प्राप्त कर लिया है या फिर बिना अनुमति ही संचालन जारी है।


खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के अनुसार बिना वैध लाइसेंस खाद्य कारोबार करना दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में विभाग जुर्माना लगाने, लाइसेंस प्राप्त करने के निर्देश देने तथा आवश्यकता पड़ने पर प्रतिष्ठान को बंद कराने जैसी कार्रवाई कर सकता है। वहीं, यदि जांच में खाद्य नमूना निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरता है, तो संबंधित संचालक के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है।


स्थानीय लोगों ने खाद्य सुरक्षा विभाग से पूरे मामले पर स्पष्ट स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि दुकान अब भी बिना लाइसेंस संचालित हो रही है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि खाद्य सुरक्षा नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित हो सके और अन्य कारोबारियों के लिए भी स्पष्ट संदेश जाए।

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