ट्रांसफर नीति पर उठे सवाल, वर्षों से जमे कर्मचारियों के तबादले अब तक नहीं

उत्तर प्रदेश महाराजगंज


तीन वर्ष से अधिक समय से तैनाती के बावजूद कार्रवाई नहीं, लंबित जांचों और स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर चर्चाएं तेज


हर्षोदय टाइम्स ब्यूरो


महराजगंज। उत्तर प्रदेश सरकार की स्थानांतरण नीति 2026-27 के तहत एक ही जनपद में तीन वर्ष से अधिक समय से कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, लेकिन महराजगंज जिले में इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विभिन्न विभागों में वर्षों से एक ही स्थान पर तैनात कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादले अब तक नहीं होने से चर्चाओं का बाजार गर्म है।


सबसे अधिक चर्चा जिला पंचायत राज विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर हो रही है। विभागीय सूत्रों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि ग्राम पंचायतों से संबंधित कई मामलों की जांच रिपोर्ट लंबे समय से लंबित पड़ी हुई है। आरोप है कि कुछ मामलों में जिलाधिकारी स्तर से समयबद्ध जांच के निर्देश दिए जाने के बावजूद महीनों बीत जाने पर भी आख्या प्रस्तुत नहीं की जा सकी है।


सूत्रों के अनुसार जिले के कई विकासखंडों में ऐसे कर्मचारी और अधिकारी कार्यरत हैं, जिन्होंने निर्धारित अवधि से अधिक समय एक ही स्थान पर पूरा कर लिया है। इसके बावजूद स्थानांतरण प्रक्रिया अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी है। इसे लेकर प्रशासनिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोगों का दावा है कि प्रभावशाली पैरवी और अन्य कारणों से तबादला प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
मिठौरा सहित कुछ विकासखंडों में लंबे समय से तैनात कर्मचारियों को लेकर स्थानीय स्तर पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं, सिसवा विकासखंड के ग्राम पंचायत चनकौली समेत कई पंचायतों से जुड़ी शिकायतों और जांचों के लंबित रहने की भी चर्चा है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कार्रवाई में हो रही देरी से शासन की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार की स्थानांतरण नीति के अनुसार एक जनपद में तीन वर्ष तथा एक मंडल में सात वर्ष की सेवा अवधि पूरी करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर स्थानांतरित किया जाना है। शासन ने मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद निर्धारित समय में कार्यभार ग्रहण करना अनिवार्य किया गया है।


ऐसे में जिले में वर्षों से एक ही स्थान पर तैनात कर्मचारियों और अधिकारियों को लेकर उठ रहे सवालों ने स्थानांतरण नीति के क्रियान्वयन पर बहस तेज कर दी है। सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने लंबित जांचों की निष्पक्ष समीक्षा कराने तथा शासन की स्थानांतरण नीति का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की मांग की है।



क्या कहती है ट्रांसफर नीति?


एक जनपद में तीन वर्ष से अधिक तैनाती पर स्थानांतरण का प्रावधान।


एक मंडल में सात वर्ष पूरे करने वालों को भी स्थानांतरण की श्रेणी में रखा गया है।


मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी प्रक्रिया लागू।


आदेश के बाद निर्धारित समय में कार्यभार ग्रहण करना अनिवार्य।


अनुपालन न होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान

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