हर्षोदय टाइम्स/अर्जुन चौधरी
सिसवा बाजार, महराजगंज। नगर पालिका परिषद सिसवा बाजार की सरकारी भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। अधिशासी अधिकारी द्वारा जिलास्तर पर भेजे गए पत्रों में नगर सीमा के भीतर स्थित विभिन्न ग्राम सभाओं की सरकारी भूमि के रिकॉर्ड, नामांतरण और कथित कब्जों की जांच कराकर स्थलीय सत्यापन कराने की मांग की गई है।
नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी ने पत्र संख्या 166 दिनांक 26 मई 2026 तथा पत्र संख्या 205 दिनांक 17 जून 2026 के माध्यम से अवगत कराया है कि नगर पालिका में शामिल ग्राम सभा खेसरारी, रायपुर, सिसवा बुजुर्ग (नगर एवं ग्रामीण क्षेत्र), सबया, सिसवा खुर्द और बीजापार की विभिन्न गाटा संख्याओं से संबंधित सरकारी भूमि के संबंध में गंभीर प्रश्न सामने आए हैं।
पत्र के अनुसार, मानवेन्द्र सिंह, शिवेन्द्र सिंह एवं धर्मेन्द्र सिंह के नाम खतौनी में लगभग 82 एकड़ 40 डिसमिल भूमि दर्ज है। वहीं आरोप है कि अन्य कथित बेनामी व्यक्तियों के माध्यम से लगभग 60 एकड़ अतिरिक्त भूमि पर भी अधिकार एवं कब्जा किया गया है। इस प्रकार कुल 142 एकड़ 40 डिसमिल भूमि नगर सीमा के भीतर उनके उपयोग एवं कब्जे में होने का दावा किया गया है। पत्र में इसे नियमों तथा उत्तर प्रदेश चकबंदी अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत बताते हुए पूरे मामले का स्थलीय सत्यापन कराने का अनुरोध किया गया है।
नगर पालिका ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि 8 अक्टूबर 2025 को आयोजित बोर्ड बैठक के प्रस्ताव संख्या 13(iii) में निकाय की सरकारी संपत्तियों पर कथित अवैध कब्जे हटाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था। बैठक में अध्यक्ष एवं अधिशासी अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के लिए अधिकृत किया गया था।
बोर्ड के निर्णय के अनुसार, निकाय की सरकारी भूमि पर हुए कथित अवैध कब्जों को विधिक प्रक्रिया अपनाकर खाली कराने की कार्यवाही किए जाने का निर्णय लिया गया था। इसी क्रम में नगर पालिका ने जांच के बाद संबंधित प्रकरण को आगे बढ़ाते हुए उच्चाधिकारियों से विस्तृत जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
इसके अलावा पत्र में यह भी उल्लेख है कि नगर पालिका में सम्मिलित ग्राम सभा की सरकारी भूमि का नाम खारिज कर महात्मा गांधी इंटर कॉलेज के नाम दर्ज किए जाने के मामले की भी जांच कराए जाने की आवश्यकता बताई गई है।
फिलहाल यह मामला प्रशासनिक जांच के स्तर पर है। आरोपों की पुष्टि सक्षम राजस्व एवं प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी। प्रशासन द्वारा स्थलीय सत्यापन और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

