हर्षोदय टाइम्स ब्यूरो
महराजगंज। अयोध्या मंदिर में हुई चोरी की चर्चाओं के बीच महराजगंज जनपद के ऐतिहासिक एवं बौद्धकालीन प्राचीन शिव मंदिर, कटहरा खास में आय-व्यय और मंदिर समिति के संचालन को लेकर विवाद गहरा गया है।
मंदिर की आय-व्यय का सार्वजनिक लेखा-जोखा प्रस्तुत करने और नई समिति गठित करने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। वहीं वर्तमान समिति के समर्थकों ने इस कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है।
मंदिर के महंत बहरैची दास एवं जितेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि वर्ष 2023 से पहले तत्कालीन ग्राम प्रधान स्वर्गीय कमलेश सिंह ने मंदिर के खाते में करीब छह लाख रुपये से अधिक की बचत होने की जानकारी दी थी। उनका आरोप है कि इसके बाद से अब तक मंदिर की आय-व्यय का सार्वजनिक हिसाब ग्रामीणों के सामने नहीं रखा गया। कई बार मांग उठने के बावजूद कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
इसी मुद्दे को लेकर मंदिर परिसर में ग्रामीणों की बैठक बुलाई गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। महंत के अनुसार समिति के पदाधिकारी बैठक में शामिल नहीं हुए, जिसके बाद मौजूद ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से मंदिर का लेखा-जोखा सार्वजनिक करने, नई समिति गठित करने तथा भंडार भवन में रखी सामग्री की सुरक्षा के लिए ताला लगाने का निर्णय लिया। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई।
महंत बहरैची दास ने आरोप लगाया कि मंदिर के विकास कार्यों में वर्तमान समिति की सक्रिय भूमिका नहीं रही। उनका कहना है कि अधिकांश विकास कार्य ग्राम पंचायत और जिला प्रशासन के सहयोग से हुए, जबकि पुजारियों, साधु-संतों और मंदिर की नियमित व्यवस्थाओं में समिति का अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उन्होंने बताया कि प्रत्येक टोले से दो-दो प्रतिनिधियों को शामिल कर नई समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इस संबंध में 26 जुलाई को मंदिर परिसर में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में आगे की रणनीति तय किए जाने की बात कही गई है।
दूसरी ओर मिथिलेश सिंह समेत अन्य ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया है कि बिना ग्राम प्रधान, मंदिर समिति और ग्रामीणों की सहमति के नई समिति बना दी गई तथा मंदिर की व्यवस्था से जुड़ी सामग्री पर ताला लगा दिया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इससे साधु-संतों और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को असुविधा हो रही है तथा सावन मेले के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका भी बढ़ गई है।
फिलहाल मामला प्रशासन के संज्ञान में है। दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर अड़े हुए हैं। एक पक्ष मंदिर की आय-व्यय का सार्वजनिक हिसाब और नई समिति गठन की मांग कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष पूरी कार्रवाई को नियमों के विरुद्ध बताते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग कर रहा है। अब 26 जुलाई की बैठक और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही विवाद की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

