सोहगी बरवा वन्यजीव प्रभाग में तबादला नीति पर उठे सवाल, मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज

उत्तर प्रदेश महाराजगंज



वर्षों से एक ही रेंज व पटल पर तैनाती का आरोप, स्थानांतरण आदेश के बावजूद कार्यमुक्त न किए जाने पर भी प्रश्नचिह्न

हर्षोदय टाइम्स ब्यूरो


महराजगंज। उत्तर प्रदेश सरकार की स्थानांतरण नीति 2026-27 के अनुपालन को लेकर सोहगी बरवा वन्यजीव प्रभाग एक बार फिर चर्चा में है। मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रभाग में कई अधिकारी और कर्मचारी वर्षों से एक ही रेंज तथा एक ही पटल पर कार्यरत हैं, जबकि शासन की नीति के अनुसार निर्धारित अवधि से अधिक समय तक एक स्थान पर तैनाती को समाप्त किया जाना चाहिए।


मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज शिकायत संख्या 40018726012084  में शिकायतकर्ता उमाशंकर प्रसाद ने कहा है कि वन विभाग में कर्मचारियों की कमी होने के बावजूद कुछ फील्ड कर्मचारियों को प्रभागीय कार्यालय से संबद्ध कर कार्यालयी कार्य कराया जा रहा है। उनका आरोप है कि इससे वन क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था प्रभावित हो रही है तथा अवैध कटान और अन्य गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण में कठिनाई उत्पन्न हो सकती है।


शिकायत में यह भी कहा गया है कि प्रभागीय कार्यालय के कुछ लिपिक पिछले पांच से आठ वर्षों से एक ही पटल पर कार्यरत हैं। आरोप है कि न तो उनका स्थानांतरण किया गया और न ही कार्य दायित्वों में परिवर्तन किया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनाती प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों के विपरीत है।


पांच से चौदह वर्षों तक एक ही रेंज में तैनाती का दावा


शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि वन प्रभाग की विभिन्न रेंजों में कई अधिकारी और कर्मचारी पांच से चौदह वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं। उन्होंने जनहित में ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों का रेंज एवं कार्यक्षेत्र परिवर्तन कराने की मांग की है, ताकि शासन की स्थानांतरण नीति का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित हो सके।


लेखा शाखा प्रभारी को लेकर भी उठे सवाल


शिकायत में प्रभागीय कार्यालय की लेखा शाखा में कार्यरत अनील कुमार यादव का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि उनका मूल पद सर्वेयर का है तथा उनका स्थानांतरण चित्रकूट धाम मंडल स्थित वन संरक्षक कार्यालय में रिक्त सर्वेयर पद पर किया जा चुका है, लेकिन अब तक उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया है।


शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि स्थानांतरण आदेश के बावजूद संबंधित कर्मचारी को रिलीव न किए जाने के लिए विभागीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि इस संबंध में विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


वित्तीय अनियमितताओं की जांच की भी मांग


शिकायतकर्ताओं ने लेखा शाखा से जुड़े कार्यों को लेकर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताते हुए संबंधित कर्मचारी की आय से अधिक संपत्ति की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग भी की है। हालांकि इन आरोपों की अब तक किसी सक्षम एजेंसी अथवा विभागीय जांच में पुष्टि नहीं हुई है। आरोपों की सत्यता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


स्थानांतरण नीति के पालन पर टिकी निगाहें


प्रदेश सरकार की स्थानांतरण नीति 2026-27 के अनुसार एक जनपद में तीन वर्ष तथा एक मंडल में सात वर्ष से अधिक समय तक तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्थानांतरण के दायरे में रखा गया है। ऐसे में मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज होने के बाद अब विभागीय जांच और संभावित प्रशासनिक कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल स्थानांतरण नीति के अनुपालन तक सीमित न रहकर प्रशासनिक जवाबदेही और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में भी सामने आ सकता है।

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