नेपाल सीमा पर खाद तस्करी का बड़ा खेल बेनकाब, पुलिस के शिकंजे में तस्कर गिरोह

उत्तर प्रदेश महाराजगंज


100 बोरी सब्सिडी वाली यूरिया बरामद, ग्राम प्रधान पति समेत चार पर मुकदमा दर्ज

हर्षोदय टाइम्स ब्यूरो


महराजगंज। भारत-नेपाल सीमा से सटे कोल्हुई थाना क्षेत्र में सब्सिडी वाली यूरिया खाद की तस्करी के खिलाफ पुलिस और कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। संयुक्त टीम ने जोगियाबारी क्षेत्र में छापेमारी कर नेपाल भेजी जाने वाली 100 बोरी इफ्को यूरिया बरामद की है। मामले में गिरफ्तार चालक की निशानदेही पर कई संदिग्धों के नाम सामने आने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।


जानकारी के अनुसार पुलिस और कृषि विभाग की टीम ने एक ईंट भट्ठे के पास खड़ी मिनी ट्रक (डीसीएम) से 100 बोरी सब्सिडी वाली यूरिया बरामद की। मौके से चालक शेषमन पुत्र मुस्तफा निवासी नौनिया, थाना सोनौली को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में ग्राम प्रधान पति जमाल अहमद बटाइडिहा, नियाज अहमद और अफसर अली के नाम सामने आए। कृषि विभाग की तहरीर पर चारों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।


सीमा पार मोटे मुनाफे के लिए किसानों का हक लूट रहे तस्कर


सूत्रों के मुताबिक खाद तस्कर पहले सीमावर्ती गांवों में यूरिया की बड़ी खेप जमा करते हैं। इसके बाद रात के अंधेरे में नदी और पगडंडी रास्तों का इस्तेमाल कर ट्यूब और अन्य साधनों से खाद नेपाल पहुंचाई जाती है। भारत में सरकारी सब्सिडी के कारण 266.50 रुपये प्रति बोरी मिलने वाली यूरिया नेपाल में 1500 से 1800 रुपये तक बिक जाती है। इसी लालच में तस्कर किसानों के हिस्से की खाद सीमा पार भेज रहे हैं, जिससे स्थानीय किसानों को 700 से 800 रुपये प्रति बोरी तक की कीमत चुकानी पड़ रही है।


पहले भी पकड़ी जा चुकी हैं कई खेपें


जिले में खाद तस्करी और कालाबाजारी के मामले लगातार सामने आते रहे हैं।


परसौना पुलिया के पास पुलिस ने 48 बोरी यूरिया के साथ एटा निवासी नदीम खान को गिरफ्तार किया था।


खड़खोड़ी स्थित सिंह खाद भंडार पर जांच के दौरान 500 बैग यूरिया का स्टॉक संदिग्ध मिला था, जो पॉश मशीन में दर्ज नहीं था।


बृजमनगंज के बहादुरी बाजार स्थित सहकारी समिति से देर रात यूरिया की खेप बाहर भेजने का प्रयास ग्रामीणों ने विफल कर दिया था, जिसके बाद गोदाम सील कर दिया गया था।


SSB और पुलिस चौकी की भूमिका पर उठे सवाल


स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीमा क्षेत्र में सक्रिय तस्करी नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पाने के पीछे कुछ जिम्मेदार एजेंसियों की लापरवाही भी है। ग्रामीणों का कहना है कि जोगियाबारी एसएसबी कैंप और पुलिस चौकी क्षेत्र से तस्करी की गतिविधियां लंबे समय से संचालित होती रही हैं। लोगों का दावा है कि पूर्व में सहायक कमांडेंट सुबीर घोष की तैनाती के दौरान तस्करी पर काफी हद तक रोक लगी थी, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद गतिविधियां फिर तेज हो गईं।


फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपी और संदिग्धों से पूछताछ कर तस्करी नेटवर्क की अन्य कड़ियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि खाद की कालाबाजारी अथवा तस्करी की सूचना तत्काल कंट्रोल रूम को दें, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।

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