• मुआवजा अटका तो हाईकोर्ट जाने की ग्रामीणों ने दी चेतावनी
• पोल वाले किसानों को भुगतान, लेकिन फसल नुकसान की क्षतिपूर्ति लंबित
• रुदलापुर, करौता, नदुआ में बढ़ा आक्रोश, ठेकेदार पर मनमानी के आरोप
हर्षोदय टाइम्स ब्यूरो महराजगंज
महराजगंज। भारत-नेपाल के बीच विद्युत आपूर्ति को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से पावर ग्रिड कारपोरेशन द्वारा बुटवल से गोरखपुर तक 400 केवी डबल सर्किट लाइन का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। यह परियोजना ऊर्जा सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, लेकिन इसके निर्माण से जुड़े विवाद अब गहराते जा रहे हैं। खासकर किसानों की फसलों को हुए नुकसान और मुआवजे में देरी को लेकर क्षेत्र में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
परियोजना के तहत जिन किसानों के खेतों में विद्युत पोल लगाए जा रहे हैं, उन्हें सर्किल रेट का 85 प्रतिशत मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है। वहीं, लाइन खींचने के दौरान जिन किसानों की खड़ी फसलें बर्बाद हुई हैं, उनके लिए क्रॉप कटिंग के आधार पर क्षतिपूर्ति देने की नीति तय की गई है।
चौक क्षेत्र के रुदलापुर, करौता और नदुआ गांवों में निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन कई किसानों को अब तक फसल नुकसान का मुआवजा नहीं मिला है। इससे किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है। किसानों का आरोप है कि ठेकेदार ने बिना पूर्व सूचना के उनके खेतों में प्रवेश कर खड़ी फसलों को रौंद दिया, जिससे गेहूं समेत अन्य फसलें नष्ट हो गईं और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
रुदलापुर निवासी किसान आद्या प्रसाद ने बताया कि गेहूं की फसल पूरी तरह पक चुकी है। यदि समय रहते नुकसान का सर्वे नहीं कराया गया, तो बाद में मुआवजा मिलना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने आशंका जताई कि कटाई के बाद कार्यदायी संस्था नुकसान से इनकार कर सकती है।
वहीं नदुआ के ग्राम प्रधान दिनेश मिश्रा का कहना है कि फसल कटाई के कगार पर है और ऐसे समय में नुकसान का तत्काल आकलन बेहद जरूरी है। यदि कटाई के बाद प्रक्रिया शुरू की गई, तो संबंधित संस्था जिम्मेदारी से बच सकती है।
पीड़ित किसानों ने पावर ग्रिड कारपोरेशन के डीजीएम से शिकायत कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और लंबित मुआवजा शीघ्र दिलाने की मांग की है। किसानों का कहना है कि जब सरकार और कंपनी ने स्पष्ट क्षतिपूर्ति नीति तय कर रखी है, तो उसके अनुपालन में लापरवाही क्यों बरती जा रही है।
मामले को लेकर किसानों ने सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही फसल नुकसान का मुआवजा नहीं मिला, तो वे आंदोलन के साथ उच्च न्यायालय की शरण लेंगे। उनका कहना है कि अपने अधिकारों के लिए वे कानूनी लड़ाई भी लड़ने को तैयार हैं।
इस संबंध में पावर ग्रिड कारपोरेशन के अवर अभियंता अभिषेक अहिरवार ने बताया कि जिन किसानों के खेतों में पोल लगाए जा रहे हैं, उन्हें मुआवजा दिया जा रहा है। फसल नुकसान के मामलों में भी संबंधित लेखपाल के माध्यम से चिन्हांकन कर क्षतिपूर्ति की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि नदुआ और रुदलापुर के कुछ किसानों की शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनका निस्तारण कराया जा रहा है।


