बागापार में शीशम से भरा ट्रक पकड़ा, कार्रवाई पर उठे बड़े सवाल: 22 घंटे बाद सिर्फ चालक पर मुकदमा

उत्तर प्रदेश महाराजगंज


सिद्धार्थनगर से कुशीनगर ले जाई जा रही थी लकड़ी, कागजात न मिलने पर पुलिस ने किया था ट्रक जब्त


ग्रामीणों का आरोप ट्रक मालिक और लकड़ी ठेकेदार पर कार्रवाई न होना संदेह पैदा करता है

हर्षोदय टाइम्स ब्यूरो


महराजगंज। जिले में अवैध लकड़ी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच कोतवाली क्षेत्र के बागापार चौराहे पर पकड़े गए शीशम की लकड़ी से भरे ट्रक के मामले में 22 घंटे बाद केवल चालक पर कार्रवाई होने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने मामले में ट्रक मालिक और लकड़ी ठेकेदार की भूमिका की जांच किए बिना ही चालक के खिलाफ कार्रवाई कर मामले को सीमित कर दिया।


जानकारी के अनुसार शनिवार रात करीब आठ बजे बागापार चौकी पर तैनात एसआई नितेश कुमार ने बागापार चौराहा स्थित सड़कहिया पुल के पास संदिग्ध ट्रक संख्या UP53 FT 9971 को रोककर जांच की। जांच के दौरान ट्रक में बड़ी मात्रा में शीशम की लकड़ी लदी मिली। पुलिस ने जब चालक से लकड़ी से संबंधित वैध कागजात मांगे तो वह कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।


कागजात न मिलने पर पुलिस को संदेह हुआ और ट्रक को कब्जे में लेकर बागापार चौकी पर खड़ा करा दिया गया। पूछताछ के दौरान चालक ने अपना नाम नीरज निवासी कोहड़गड्डी, खड्डा जनपद कुशीनगर बताया। प्रारंभिक पूछताछ में यह भी जानकारी सामने आई कि ट्रक में लदी लकड़ी का मालिक गोविंद चौहान बताया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।


घटना की सूचना मिलते ही पकड़ी रेंज के वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंच गई। वन दरोगा गौरव त्रिपाठी के नेतृत्व में टीम ने ट्रक में लदी लकड़ी की जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में लकड़ी शीशम की बताई जा रही है। वन विभाग की टीम लकड़ी की मात्रा और उसके वैध या अवैध होने की पुष्टि में जुटी रही।


इस दौरान मौके पर बागापार चौकी प्रभारी जटाशंकर सिंह, वन दरोगा हरिराम यादव, वन रक्षक अभिषेक बाजपेई सहित पुलिस व वन विभाग के कर्मचारी मौजूद रहे।


बताया जा रहा है कि ट्रक को पकड़ने के करीब 22 घंटे बाद पुलिस ने वन अधिनियम के तहत चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे न्यायालय भेज दिया। हालांकि जब चौकी प्रभारी जटाशंकर सिंह से मुकदमे की संख्या के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन बताया कि चालक के खिलाफ कार्रवाई कर न्यायालय भेज दिया गया है।


इधर इस मामले को लेकर ग्रामीणों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में कीमती शीशम की लकड़ी बिना ट्रक मालिक या ठेकेदार की जानकारी के कैसे भेजी जा सकती है। ऐसे में केवल चालक पर कार्रवाई करना कई सवाल खड़े करता है।


ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि मामले में कहीं न कहीं बड़ा खेल हो सकता है और प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो तो लकड़ी के असली मालिक तथा लकड़ी लदे ट्रक के मालिक सहित अवैध कटान से जुड़े लोगों का भी खुलासा हो सकता है।

फिलहाल पुलिस और वन विभाग मामले की जांच की बात कह रहे हैं, लेकिन ट्रक मालिक और लकड़ी ठेकेदार की भूमिका पर अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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