हर्षोदय टाइम्स/अर्जुन चौधरी
सिसवा बाजार/महराजगंज- नगर पालिका परिषद सिसवा बाजार के वार्ड संख्या–10, बिस्मिल नगर (पिपरिया) में हाल ही में घटी एक हृदयविदारक घटना ने पूरे गांव को गहरे शोक में डुबो दिया। लेकिन इसी दुख की घड़ी में गांववासियों ने इंसानियत और आपसी सहयोग की ऐसी मिसाल पेश की, जो समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गई।
पिपरिया निवासी कोटेदार विपिन गुप्ता (उम्र लगभग 32 वर्ष) दिव्यांग होने के बावजूद मेहनत, स्वाभिमान और ईमानदारी के साथ अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। बीते 27 दिसंबर 2025 को वह सिसवा बाजार से ट्राई-स्कूटी से घर लौट रहे थे, तभी रास्ते में हुए एक सड़क हादसे में उन्हें सिर में गंभीर चोटें आईं। इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
विपिन गुप्ता की असामयिक मौत से उनकी पत्नी और चार मासूम बच्चों शिल्पा (13 वर्ष), अंकित (11 वर्ष), पुष्पा (9 वर्ष) और अभिनंदन (6 वर्ष) के सिर से पिता का साया उठ गया। परिवार पहले से ही कठिन परिस्थितियों से जूझ रहा था, क्योंकि अप्रैल 2023 में उनके पिता चंद्रिका की भी सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो चुकी थी। ऐसे में विपिन की मौत ने परिवार से आखिरी सहारा भी छीन लिया।
इस संकट की घड़ी में गांव के पूर्व प्रधान अतिउल्लाह के छोटे भाई और स्थानीय फार्मेसी संचालक मजीउल्लाह सिद्दीकी पीड़ित परिवार की मदद के लिए आगे आए। उन्होंने इस दुख को केवल महसूस ही नहीं किया, बल्कि इसे अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझते हुए सोशल मीडिया और व्यक्तिगत संपर्कों के माध्यम से गांववासियों से क्रिया-कर्म और परिवार की सहायता के लिए अपील की।
उनकी इस पहल का असर यह हुआ कि पूरा गांव एकजुट हो गया। पिपरिया गांव के पात्र गृहस्थी और बीपीएल कार्डधारकों ने कुछ अत्यंत जरूरतमंद परिवारों को छोड़कर इस माह का अपना राशन पीड़ित परिवार को सौंप दिया। बिना किसी सरकारी सहायता के गांववासियों ने सामूहिक रूप से परिवार को सहारा दिया।
पिपरिया गांव का यह मानवीय प्रयास यह साबित करता है कि आज भी समाज में संवेदना, सहयोग और इंसानियत जीवित है। मजीउल्लाह सिद्दीकी की पहल और गांववासियों की एकजुटता ने यह संदेश दिया कि दुख की घड़ी में समाज का साथ ही सबसे बड़ी ताकत होता है।


