संपादकीय : मीठे की बढ़ती भूख, स्वास्थ्य पर कड़वा असर

उत्तर प्रदेश महाराजगंज

हर्षोदय टाइम्स ब्यूरो महराजगंज

परतावल /महाराजगंज । सुबह की शुरुआत अगर गरमा-गरम कचौड़ी-जलेबी से न हो तो कई लोगों की तृप्ति पूरी नहीं होती। पर दुर्भाग्य यह है कि यह स्वाद अब सीधे स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहा है। परतावल ही नहीं, पूरे जिले में तेजी से बढ़ते डायबिटीज के मामले इस बात की गवाही दे रहे हैं। मिठाई का शौक, असंयमित भोजन और बदलती जीवनशैली आज मधुमेह को एक सामान्य बीमारी की तरह घर-घर पहुंचा चुके हैं।

चिकित्सकों की मानें तो ओपीडी में आने वाले मरीजों में बड़ी तादाद उन लोगों की है, जिनकी शुगर नियंत्रण से बाहर हो चुकी है। सिर्फ मिठाई ही नहीं, शादी–पार्टी जैसे आयोजनों में अनियंत्रित भोजन इस बीमारी को और जड़ से मजबूत कर रहा है। मधुमेह केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि शरीर के हर नाजुक अंग पर लगातार चोट पहुंचाने वाली स्थिति है । चाहे वह गुर्दा हो, नसें हों या दिल।

परतावल निवासी बुजुर्ग देवेंद्र प्रसाद इसका जीवंत उदाहरण हैं। आंखों का ऑपरेशन होना था, लेकिन बढ़ी हुई शुगर ने इलाज ही रोक दिया। चिकित्सा शिविरों में भी लोग तब चौंकते हैं, जब उन्हें पता चलता है कि वे लंबे समय से डायबिटीज के साथ जी रहे थे, बस अनजान थे।

दवा दुकानों पर डायबिटीज की दवाओं की बढ़ती खपत इसका एक और संकेत है कि बीमारी कितनी तेजी से पैर पसार चुकी है। चिकित्सक डॉ. एस.के. सिंह, डॉ. एम. हुसैन और डॉ. आर.ए. अंसारी सभी का एक ही मत है: जीवनशैली बदलिए, वरना बीमारी आपके जीवन की दिशा बदल देगी।
योग, व्यायाम, संयमित भोजन और दवा यही इसके नियंत्रण की चाबी है।

आज आवश्यकता है जागरूकता की, आत्मनियंत्रण की और भोजन को लेकर गंभीरता की। गीता में कहा गया है  “भोजन उतना ही करो, जितना जीवित रहने के लिए आवश्यक है।” मगर आज भोजन स्वाद के लिए है, स्वास्थ्य के लिए नहीं।

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