गाइडलाइन का पालन न करने वाले भट्टों पर चलेगा बुलडोजर, 5000 मालिकों को मिलेगी राहत
लखनऊ/महाराजगंज। उत्तर प्रदेश में चल रहे अवैध ईंट भट्ठों पर अब बड़ा शिकंजा कसने जा रहा है। प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि गाइडलाइन का पालन न करने वाले 1000 से अधिक अवैध भट्टों को जल्द ही बंद किया जाएगा। इस अभियान में जिला प्रशासन, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त टीमें कार्रवाई करेंगी।
सरकार ने प्रदेश के ईंट भट्ठा उद्योग को व्यवस्थित और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप लाने के लिए सख्त रुख अपनाया है। अधिकारियों के अनुसार, राज्य में इस समय 22,000 से अधिक ईंट भट्ठे संचालित हैं, जिनमें एक बड़ा हिस्सा बिना अनुमति या निर्धारित मानकों के विपरीत चल रहा है।
– नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई
प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन भट्टों ने पर्यावरण संरक्षण, दूरी मानक और उत्सर्जन नियंत्रण से जुड़ी शर्तों का पालन नहीं किया, उन्हें तत्काल प्रभाव से बंद किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक जिले में सूची तैयार की जा रही है। संबंधित जिलाधिकारियों को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ समन्वय बनाकर अवैध भट्टों की पहचान और कार्रवाई सुनिश्चित करें।
सूत्रों के अनुसार, लगभग 1000 से 1200 भट्टों को पहली चरण की कार्रवाई में बंद करने की तैयारी है। जिन इकाइयों ने आवेदन या मानक पूरे नहीं किए हैं, उन्हें नोटिस भेजा जा चुका है।
– नए नियमों से मिलेगी राहत
वहीं, सरकार उद्योग को राहत देने के उद्देश्य से ईंट भट्ठा नीति 2012 में संशोधन लाने जा रही है। इसके तहत करीब 5000 भट्ठा मालिकों को राहत मिलने की संभावना है। यह राहत उन भट्टों को दी जाएगी जो तकनीकी कारणों या दस्तावेजी देरी की वजह से नियमित नहीं हो पाए थे।
संशोधित नीति के बाद पात्र भट्ठों को पर्यावरणीय मंजूरी और संचालन की अनुमति सरल प्रक्रिया के तहत दी जाएगी। इस कदम से सरकार को कर संग्रहण में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है, साथ ही अवैध संचालन पर अंकुश लगेगा।
– पर्यावरणीय मानकों पर सख्ती
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) ने साफ किया है कि प्रत्येक ईंट भट्ठे को अब “झिग-ज़ैग तकनीक” में परिवर्तित होना अनिवार्य होगा। यह तकनीक पारंपरिक भट्टों की तुलना में 30 प्रतिशत कम धुआँ और कार्बन उत्सर्जन करती है। साथ ही स्कूल, अस्पताल, आवासीय क्षेत्र और धार्मिक स्थलों से एक किलोमीटर की दूरी का नियम कड़ाई से लागू किया जाएगा।
– प्रदेश में 22 हजार से अधिक भट्टे
प्रदेश में फिलहाल 22,000 से अधिक ईंट भट्ठे संचालित हैं, जिनमें से बड़ी संख्या ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में है। कई भट्टे बिना लाइसेंस, बिना एनओसी और बिना पर्यावरणीय मंजूरी के चल रहे हैं। सरकार का यह कदम ऐसे भट्टों पर अंकुश लगाने और उद्योग को नियमानुसार ढालने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
– सरकार की मंशा और प्रभाव
सरकार का उद्देश्य न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है, बल्कि ईंट भट्ठा उद्योग को नियमित कर राजस्व व्यवस्था मजबूत करना भी है। नियमों के अनुपालन से प्रतिस्पर्धा में पारदर्शिता आएगी और पर्यावरणीय नुकसान में भी कमी आएगी।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “राज्य सरकार की प्राथमिकता साफ है , प्रदूषण फैलाने वाले और नियम तोड़ने वाले भट्टों को किसी भी कीमत पर नहीं चलने दिया जाएगा, जबकि ईमानदार उद्योगपतियों को हरसंभव सहायता दी जाएगी।”

