चौक बाजार/ महाराजगंज (हर्षोदय टाइम्स) । गुरु गोबिंद सिंह को मुगल शासकों के खिलाफ़ विद्रोह करने और आक्रमणकारियों से लोगों के हितों की रक्षा करने के लिए जाना जाता है। वे एक दयालु व्यक्ति थे जिन्होंने सभी के लिए न्याय, शांति और समानता का उपदेश दिया।
उन्होंने एक संत का जीवन जिया और अपने लेखन से लाखों सिखों को प्रेरित किया, जो उनके जीवन जीने के तरीके को दर्शाते हैं। उनके सख्त सिद्धांत थे, जिनका उन्होंने और उनके अनुयायियों ने धार्मिक रूप से पालन किया और आज भी करते हैं। गुरु गोबिन्द सिंह सिखों के दसवें और अंतिम गुरु थे। श्री गुरू तेग बहादुर जी के बलिदान के उपरान्त 11 नवम्बर सन् 1675 को 10 वें गुरू बने। आप एक महान योद्धा, चिन्तक, कवि, भक्त एवं आध्यात्मिक नेता थे। सन् 1699 में बैसाखी के दिन उन्होंने खालसा पंथ (पन्थ) की स्थापना की जो सिखों के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।
उक्त बातें गोरक्षपीठाधीश्वर महन्त अवेद्यनाथ स्नाकोत्तर महाविद्यालय में गुरु गोविंद सिंह जयंती के अवसर पर छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य लेफ्टिनेंट डॉ रामपाल यादव ने कही।
युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल विभाग महाराजगंज एवं खेल संघ के समन्वय द्वारा आयोजित उत्तर प्रदेश ग्रामीण खेल लीग जनपद स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में महाविद्यालय की बालिका वर्ग की वॉलीबॉल टीम विजेता रही।

इस अवसर पर टीम के कोच एवं पूरी टीम को बधाई दी गई साथ ही टीम सदस्यों को महाविद्यालय के प्रभारी डॉ. शैलेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व प्राचार्य दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज, गोरखपुर एवं महाविद्यालय के प्राचार्य लेफ्टिनेंट डॉ. रामपाल यादव के द्वारा पूरे टीम को सम्मानित किया गया। उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दी गई।
इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षकगण, कर्मचारीगण एवं छात्र-छात्रायें उपस्थित रहे। उक्त सूचना महाविद्यालय के सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी डॉ सरोज रंजन ने दी।
