डीएम साहब! चारे के अभाव और लापरवाही से दम तोड़ रहीं गौशाला की गायें, अहमदपुर गोसदन की बदहाल व्यवस्था पर उठे सवाल

उत्तर प्रदेश महाराजगंज

हर्षोदय टाइम्स ब्यूरो


महराजगंज। जिला मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर दूर सदर क्षेत्र की ग्राम पंचायत अहमदपुर उर्फ हड़हवा स्थित गोसदन की बदहाल व्यवस्था ने पशु संरक्षण की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गौशाला में कार्यरत कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि चारे की भारी कमी, दवाओं के अभाव और जिम्मेदार अधिकारियों की कथित लापरवाही के चलते यहां प्रतिदिन दो से तीन गायों की मौत हो रही है। यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो हालात और भी भयावह हो सकते हैं।


कर्मचारियों के अनुसार, पहले गौशाला में सभी पशुओं को प्रतिदिन करीब दो क्विंटल आशु आहार दिया जाता था, लेकिन अब इसे घटाकर केवल 75 किलोग्राम कर दिया गया है। साथ ही गुड़, नमक और हरे चारे की व्यवस्था भी लगभग बंद हो चुकी है। पर्याप्त पोषण न मिलने से कई गायें कमजोर और बीमार हो गई हैं।
कर्मचारियों का आरोप है कि गौशाला में बिजली, पंखे और अन्य जरूरी संसाधन लंबे समय से खराब पड़े हैं, लेकिन उनकी मरम्मत नहीं कराई गई। परिसर में गंदगी का अंबार लगा है, जिससे पशुओं और कर्मचारियों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


मजदूरों ने बताया कि मंगलवार को तीन और बुधवार को भी कई गायों की मौत हुई, जिनके शवों को दफना दिया गया। वहीं तीन अन्य गायें गंभीर रूप से बीमार बताई जा रही हैं।
कर्मचारियों का दावा है कि गौशाला में वर्तमान में करीब 120 गायें हैं, जबकि सचिव द्वारा 136 गायों के नाम पर भुगतान कराया जा रहा है। आरोप है कि मृत पशुओं को भी रिकॉर्ड में जीवित दिखाकर चारा और अन्य मदों का भुगतान लिया जा रहा है। यदि जांच में यह सही पाया जाता है तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला हो सकता है।


कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि गोसदन से 1,500 रुपये प्रति ट्रॉली की दर से गोबर खाद बेची गई है और अब तक आठ ट्रॉली खाद का विक्रय हो चुका है। वहीं किसान दिनेश यादव का कहना है कि वर्ष 2025-26 में हरे चारे के लिए उनकी 40 डिसमिल भूमि अनुबंधित की गई थी, लेकिन अब तक उन्हें भुगतान नहीं मिला। कई बार मांग करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई।


आरोप है कि गौशाला के औषधि कक्ष में एक भी दवा उपलब्ध नहीं है। कर्मचारियों का कहना है कि पशु चिकित्सक केवल औपचारिक निरीक्षण कर लौट जाते हैं, जबकि बीमार गायों के समुचित इलाज की व्यवस्था नहीं की जाती। लगातार हो रही मौतों ने पशु चिकित्सा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।


इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था। उन्होंने आश्वासन दिया कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी और यदि किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।


फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि गौशाला में रह रही बेजुबान गायों को पर्याप्त चारा, इलाज और सुरक्षित वातावरण कब मिलेगा तथा प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।

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