दक्षिणी चौक वन रेंज में सागौन के कटान पर उठे सवाल, 17 पेड़ों के परमिट के बीच 35 पेड़ काटे जाने का दावा

उत्तर प्रदेश महाराजगंज



हर्षोदय टाइम्स ब्यूरो

महराजगंज। सोहगी बरवा वन्यजीव प्रभाग के दक्षिणी चौक वन रेंज की खोस्टा बीट अंतर्गत ग्राम पंचायत पिपरिया के गुरु गोविंद नगर में सागौन के पेड़ों की कटान का मामला तूल पकड़ता जा रहा है।

स्थानीय लोगों का दावा है कि बगीचे में करीब 35 सागौन के पेड़ काट दिए गए, जबकि वन विभाग का कहना है कि सिर्फ 17 पेड़ों के कटान का वैध परमिट जारी किया गया था। दोनों दावों के बीच अंतर ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है।
घटना के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। कटान स्थल का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में कटे हुए सागौन के ठूंठ दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

ग्रामीणों और ग्राम पंचायत के जिम्मेदार लोगों का कहना है कि जिस भूमि पर पेड़ काटे गए, वह खलिहान और बंजर भूमि की श्रेणी में आती है। उन्होंने राजस्व विभाग को मामले की जानकारी देते हुए संबंधित लेखपाल से भूमि की पैमाइश कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पैमाइश के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पेड़ किस श्रेणी की भूमि पर स्थित थे और कटान नियमानुसार हुआ या नहीं।
उधर, वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार संबंधित स्थल के लिए केवल 17 सागौन के पेड़ों की कटान की अनुमति दी गई थी। यदि जांच में इससे अधिक पेड़ों की कटाई की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभागीय सूत्रों के मुताबिक परमिट पर कार्य कराने वाला ठेकेदार गैर जनपद का बताया जा रहा है, जो कटान के बाद मौके से चला गया।

वन एवं राजस्व विभाग के अलग-अलग दावों के कारण मामला और उलझ गया है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि वास्तव में कितने पेड़ों का वैध परमिट जारी हुआ, कितने पेड़ काटे गए और कटान स्वीकृत सीमा के भीतर हुआ या उससे अधिक। साथ ही यह भी तय होना है कि संबंधित भूमि वन विभाग की है, राजस्व विभाग की है या खलिहान एवं बंजर भूमि के रूप में दर्ज है।
पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि सागौन जैसे बहुमूल्य वृक्षों की कटान के मामलों में पूरी पारदर्शिता बरती जानी चाहिए। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।


प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) राजेंद्र निरंजन सुर्वे ने कहा कि मामला संज्ञान में है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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