मिठौरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत चैनपुर में विकास कार्यों पर सवाल

उत्तर प्रदेश महाराजगंज

बिना ईंट उद्योग के नाम से बिल लगाकर भुगतान कराने का आरोप

ग्रामीणों ने डीएम से निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की, सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका

हर्षोदय टाइम्स ब्यूरो

महराजगंज। मिठौरा विकास खंड की ग्राम पंचायत चैनपुर में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत में कराए गए निर्माण कार्यों के भुगतान संबंधी दस्तावेजों को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पंचायत में ऐसे प्रतिष्ठान के नाम से लाखों रुपये के बिल लगाए गए हैं, जिसका वास्तविक संचालन अथवा निर्माण सामग्री उपलब्ध कराने का कोई स्पष्ट आधार नहीं है। मामले को लेकर ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से जांच कराए जाने की मांग उठाई है।


ग्रामीणों के अनुसार पंचायत में कराए गए विभिन्न निर्माण कार्यों के भुगतान हेतु प्रस्तुत बिलों में निर्माण सामग्री, ईंट, बालू, गिट्टी, सीमेंट समेत अन्य सामान की आपूर्ति दर्शाई गई है। आरोप है कि संबंधित बिलों के आधार पर सरकारी धन का भुगतान भी किया गया, जबकि मौके पर वास्तविक आपूर्ति और बिलों की सत्यता को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों में चौक बाजार स्थित एक फर्म के नाम से जारी बिलों का उल्लेख है। इन बिलों में अलग-अलग तिथियों पर निर्माण सामग्री की आपूर्ति दर्शाते हुए लाखों रुपये का भुगतान दिखाया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिलों में अंकित सामग्री और वास्तविक कार्यों के बीच भारी अंतर है।


ग्रामीणों का कहना है कि यदि संबंधित फर्म द्वारा वास्तव में सामग्री की आपूर्ति की गई है तो उसकी परिवहन व्यवस्था, स्टॉक रजिस्टर, जीएसटी विवरण और भुगतान अभिलेखों की जांच कराई जानी चाहिए। इससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पंचायत में कराए गए कई निर्माण कार्यों की गुणवत्ता भी मानकों के अनुरूप नहीं है। उनका कहना है कि कागजों पर अधिक मात्रा में सामग्री दिखाकर भुगतान कराया गया, जबकि धरातल पर कार्यों की स्थिति अलग दिखाई देती है।

ग्रामीणों का दावा है कि यदि तकनीकी टीम द्वारा मौके पर माप-पुस्तिका (एमबी), कार्यदायी अभिलेख और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों का मिलान कराया जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। मामले को लेकर गांव के कई लोगों ने जिला प्रशासन से शिकायत करने की तैयारी शुरू कर दी है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की जांच जिला स्तरीय टीम अथवा किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। साथ ही भुगतान संबंधी सभी अभिलेखों को सार्वजनिक कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में अनियमितता सिद्ध होती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि सरकारी धन के दुरुपयोग पर रोक लग सके। फिलहाल मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है।

आरोपों की पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी। यदि शिकायत के आधार पर जांच शुरू होती है तो ग्राम पंचायत में हुए विकास कार्यों, भुगतान प्रक्रिया और बिलों की वैधता की विस्तृत पड़ताल की जा सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *