सीएचसी परतावल की इमरजेंसी सेवा पर उठे सवाल, वीडियो वायरल

उत्तर प्रदेश महाराजगंज


गंभीर मरीज को लेकर पहुंचे परिजनों ने डॉक्टर न मिलने का लगाया आरोप, अधीक्षक बोले , ड्यूटी पर मौजूद था स्टाफ


महराजगंज। परतावल स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की स्वास्थ्य सेवाएं एक बार फिर चर्चा में हैं। शनिवार सुबह इमरजेंसी व्यवस्था से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हलचल मच गई। वीडियो में मरीज के परिजन अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मचारियों की अनुपस्थिति का आरोप लगाते दिखाई दे रहे हैं।


जानकारी के अनुसार अर्जुन साहनी नामक युवक की शनिवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिजन उसे गंभीर हालत में इलाज के लिए सीएचसी परतावल लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि सुबह करीब सात बजे इमरजेंसी वार्ड में काफी देर तक कोई चिकित्सक अथवा स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं मिला। इस दौरान मरीज के साथ आए लोग अस्पताल परिसर में मदद के लिए इधर-उधर भटकते रहे।


मरीज की माता रंभा देवी, पिता बहादुर साहनी और मामा राजू साहनी ने आरोप लगाया कि समय पर इलाज नहीं मिलने से युवक की हालत लगातार बिगड़ती रही। परिजनों का कहना है कि जब काफी देर तक कोई सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने अस्पताल की स्थिति का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। इसके बाद वीडियो तेजी से वायरल हो गया।


वायरल वीडियो में अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ही आम लोगों के इलाज का प्रमुख सहारा हैं, ऐसे में इमरजेंसी सेवा में लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है।


उधर, सीएचसी अधीक्षक अमित कुमार ने परिजनों के आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि इमरजेंसी में चिकित्सक और स्टाफ अपनी ड्यूटी पर मौजूद थे तथा वीडियो को भ्रामक तरीके से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है और पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी।


गौरतलब है कि जिले के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता और इमरजेंसी सेवाओं को लेकर पहले भी कई शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में परतावल सीएचसी का यह मामला एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को कटघरे में खड़ा कर रहा है।

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