महराजगंज। सिसवा ब्लॉक की चनकौली ग्राम पंचायत में कथित भ्रष्टाचार की जांच अब खुद सवालों के घेरे में है। शिकायत दर्ज हुए करीब दो महीने बीत चुके हैं, जांच भी पूरी हो चुकी है, लेकिन प्रशासन अब तक यह तय नहीं कर पाया कि आखिर दोषी कौन है। जांच रिपोर्ट तैयार होने के बावजूद उसे सार्वजनिक न किया जाना और स्पष्ट निष्कर्ष का अभाव, पूरे मामले को संदिग्ध बना रहा है।
आईजीआरएस के जरिए दर्ज शिकायत पर जिलाधिकारी ने 12 फरवरी 2026 को जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद लंबी खामोशी के बाद 18 मार्च को जांच कराई गई और 7 अप्रैल को आख्या भी प्रस्तुत कर दी गई। लेकिन हैरानी की बात यह है कि रिपोर्ट आने के बाद भी प्रशासन ने न तो कोई निष्कर्ष घोषित किया और न ही कार्रवाई की दिशा तय की। मुख्य विकास अधिकारी को भी रिपोर्ट में स्पष्टता नहीं मिली, जिसके चलते 21 अप्रैल को दोबारा स्पष्ट जवाब मांगा गया।
शिकायतकर्ता राम सनेही का आरोप है कि जांच पूरी होने के बावजूद रिपोर्ट को जानबूझकर दबाया जा रहा है। उनका कहना है कि “अधिकारियों ने एक हफ्ते में रिपोर्ट देने का भरोसा दिया था, लेकिन अब महीनों बीतने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिल रहा। इससे साफ लगता है कि मामला दबाने की कोशिश हो रही है।” ग्रामीणों में भी इसे लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट प्रशासन के पास है, तो आखिर उसे सार्वजनिक करने और दोष तय करने में देरी क्यों? क्या यह महज लापरवाही है या फिर किसी को बचाने की कोशिश? चनकौली का यह मामला अब पारदर्शिता और जवाबदेही की कसौटी बनता जा रहा है, जिस पर प्रशासन की चुप्पी और भी कई सवाल खड़े कर रही है।


