फीस पर लगाम: डीएम का सख्त फरमान, अब स्कूलों को दिखानी होगी पूरी हिस्ट्री
महराजगंज जनपद में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और अभिभावक हितैषी बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में विद्यालय प्रबंधकों एवं प्रधानाचार्यों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में फीस वृद्धि और वसूली की प्रक्रिया को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए।
डीएम ने स्पष्ट किया कि सभी वित्तविहीन प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों को उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम 2018 व संशोधित अधिनियम 2020 का शत-प्रतिशत पालन करना होगा। उन्होंने पिछले पांच वर्षों के शुल्क, ड्रेस एवं पुस्तकों की जांच के लिए त्रिसदस्यीय समिति गठित करने के निर्देश दिए।
यह समिति नायब तहसीलदार, खंड शिक्षा अधिकारी तथा राजकीय विद्यालयों के प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक की निगरानी में कार्य करेगी और अपनी रिपोर्ट सीधे जिलाधिकारी को सौंपेगी।
बैठक में यह भी निर्देशित किया गया कि सभी विद्यालय अपनी वेबसाइट एवं सूचना पट्ट पर पिछले पांच वर्षों का शुल्क विवरण, यूनिफॉर्म और पुस्तकों की जानकारी अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करें। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) + 5 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि करने वाले विद्यालयों से जवाब तलब किया जाएगा तथा आवश्यक होने पर शुल्क में कटौती कर समायोजन भी कराया जाएगा।
डीएम ने यह भी साफ किया कि कोई भी विद्यालय पांच वर्षों के भीतर यूनिफॉर्म में बदलाव नहीं करेगा। साथ ही अभिभावकों को किसी एक दुकान से किताबें, कॉपी या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा और न ही विद्यालय स्वयं इनका विक्रय करेंगे।
उन्होंने निर्देश दिया कि केवल मान्यता प्राप्त पुस्तकों का ही संचालन किया जाए तथा जिन सुविधाओं का संचालन विद्यालय द्वारा नहीं किया जा रहा है, उनका शुल्क किसी भी स्थिति में नहीं लिया जाएगा।
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को इन निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए, ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे और अभिभावकों का विश्वास सुदृढ़ हो।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक पी.के. शर्मा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ऋद्धि पांडेय, एआरटीओ मनोज सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

