विजन एकेडमी में श्रद्धा, आस्था और ज्ञानभाव के साथ मनाया गया वसंत पंचमी पर्व

उत्तर प्रदेश महाराजगंज

हर्षोदय टाइम्स ब्यूरो

महाराजगंज। वसंत पंचमी के पावन अवसर पर विजन एकेडमी का परिसर विद्या, संस्कार और सकारात्मक चेतना से सराबोर दिखाई दिया। ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती के पूजन के साथ विद्यालय में शैक्षणिक गरिमा और सांस्कृतिक मूल्यों का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चारण और सरस्वती वंदना से हुई, जिसके बाद शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने माँ सरस्वती के चरणों में पुष्प अर्पित कर विद्यालय परिवार की बौद्धिक प्रगति और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। पूरे वातावरण में अनुशासन, शांति और आस्था की अनुभूति स्पष्ट रूप से महसूस की गई।


विद्यालय के निदेशक ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह सोच, संस्कार और समाज के प्रति उत्तरदायित्व विकसित करने का माध्यम है। वसंत पंचमी हमें स्मरण कराती है कि निरंतर अध्ययन, आत्मअनुशासन और नैतिक मूल्यों के बिना शिक्षा अधूरी है।


प्रधानाचार्य ने कहा कि माँ सरस्वती की उपासना विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इससे सीखने की जिज्ञासा, धैर्य और विवेकशील दृष्टिकोण का विकास होता है, जो जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उपयोगी सिद्ध होता है।
इस अवसर पर शिक्षकों ने भी अपने विचार साझा किए। विज्ञान शिक्षक अभय मिश्रा ने ज्ञान और नवाचार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वैज्ञानिक सोच समाज को आगे बढ़ाने की कुंजी है। सामाजिक विज्ञान शिक्षक आर.एम. पाठक ने शिक्षा को सामाजिक चेतना का आधार बताया, जबकि गणित शिक्षक टी.एन. पटेल ने निरंतर अभ्यास और तर्कशक्ति को सफलता की आधारशिला बताया।
विद्यालय के चेयरपर्सन एडवोकेट डॉ. प्रणव जी. श्रीवास्तव एवं एडवोकेट विभव जी. श्रीवास्तव ने समस्त शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान की पहचान सामूहिक परिश्रम और अनुशासन से बनती है। उन्होंने विद्यालय परिवार के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।


कार्यक्रम में विद्यालय के सभी शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में माँ सरस्वती से ज्ञान, विवेक और सकारात्मक सोच का आशीर्वाद मांगा।
विजन एकेडमी में आयोजित यह वसंत पंचमी समारोह शिक्षा, संस्कृति और समर्पण का प्रतीक बनकर उभरा, जिसने यह संदेश दिया कि सशक्त राष्ट्र निर्माण की नींव सशक्त और संस्कारयुक्त शिक्षा से ही रखी जा सकती है।

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