परतावल/महराजगंज।लगभग छह माह से अमवा और बसहिया बुजुर्ग गांवों में भय का कारण बने उत्पाती बंदर को आखिरकार ग्रामीणों ने पकड़कर राहत की सांस ली। आए दिन लोगों पर हमला कर दर्जनों ग्रामीणों को घायल करने वाला यह बंदर क्षेत्र में आतंक का पर्याय बन चुका था। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं घर से निकलने में डरने लगे थे।
बंदर के हमलों में राकेश गुप्ता, धर्मेंद्र शर्मा, अमरजीत यादव, वशिष्ठ दुबे, गोलका डोम, सितंबर प्रसाद, राजकुमार गौड़ सहित कई ग्रामीण घायल हुए थे। ग्रामीणों के अनुसार बंदर अचानक हमला कर लोगों को दौड़ा-दौड़ाकर काट लेता था, जिससे गांव में अफरा-तफरी मच जाती थी।
स्थानीय लोगों ने कई बार वन विभाग से शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। विभागीय उदासीनता से परेशान होकर ग्रामीणों ने स्वयं पहल करने का निर्णय लिया। इसके बाद बुलबुल, राकेश यादव, संजय जायसवाल, राजन सैनी समेत अन्य ग्रामीणों ने बस्ती निवासी हकीकुल्लाह और बालवीर की टीम को बुलाया।
टीम ने ग्रामीणों के सहयोग से जाल बिछाकर बंदर को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया। पकड़े गए बंदर को पिंजरे में बंद कर भंवराबारी जंगल में छोड़ दिया गया। बंदर के पकड़े जाने के बाद गांव में सामान्य स्थिति लौट आई है और लोगों ने राहत महसूस की।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो कई लोग घायल होने से बच सकते थे।

