हर्षोदय टाइम्स / विमलेश कुमार पाण्डेय
महराजगंज/घुघली। सरकार द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत मिलने वाले राशन की जगह अब लाभार्थियों के बैंक खातों में नकद राशि भेजने की नई योजना ने गरीब परिवारों में चिंता बढ़ा दी है।
ग्रामीण इलाकों की महिलाओं का कहना है कि पहले सीधे उचित मूल्य की दुकानों से राशन मिल जाता था, जिससे परिवार को दो वक्त का भोजन सुनिश्चित होता था। लेकिन अब नकद ट्रांसफर से आशंका है कि पैसा शराब व अन्य गैर-जरूरी खर्चों में निकल जाएगा, जिससे परिवार के लिए जरूरी अनाज जुटाना मुश्किल हो जाएगा।

महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस निर्णय से सबसे अधिक प्रभावित महिलाएं और बच्चे होंगे। घुघली की रेशमा देवी ने बताया— “सरकार का यह कदम नशे की खपत को और बढ़ावा देगा। घर के राशन की गारंटी अब खत्म हो जाएगी।”
विशेषज्ञों का मानना है कि पहले से ही महंगाई और बेरोजगारी की मार झेल रहे गरीब परिवारों के लिए यह नीति राहत से ज्यादा मुसीबत बन सकती है। कई महिलाओं ने इसे “परिवार के भोजन पर संकट” करार दिया है।
अब सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार ने योजना लागू करने से पहले महिलाओं और सामाजिक संगठनों की राय ली थी? नकद ट्रांसफर योजना का असर गरीबों पर कितना सकारात्मक या नकारात्मक होगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।

