पीवी सिंधु व नीरज चोपड़ा के जीवन संघर्ष से छात्रों को मिली प्रेरणा
हर्षोदय टाइम्स ब्यूरो
पुरैना।महराजगंज जनपद के उपनगर घुघली स्थित डीएवी नारंग इंटर कॉलेज में सोमवार को ओलंपिक एशियाड दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय के खेल शिक्षक अजय कुमार श्रीवास्तव ने छात्रों को ओलंपिक के इतिहास व उद्देश्यों की जानकारी दी और ओलंपिक खिलाड़ियों के प्रेरणादायी जीवन पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम शासन के निर्देश पर जिला विद्यालय निरीक्षक महाराजगंज प्रदीप कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। खेल शिक्षक श्रीवास्तव ने बताया कि प्राचीन यूनान की राजधानी एथेंस में वर्ष 1896 में पहले ओलंपिक खेलों की शुरुआत हुई थी। ओलंपिक चार प्रकार के होते हैं ग्रीष्मकालीन, शीतकालीन, पैरा ओलंपिक और यूथ ओलंपिक। पहले ओलंपिक में 14 देशों के 200 खिलाड़ियों ने भाग लिया था, जिनमें 20 महिला खिलाड़ी भी शामिल थीं।
श्रीवास्तव ने कहा कि खेल जीवन में अनुशासन, परिश्रम और आत्मविश्वास को बढ़ावा देता है। उन्होंने भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु के संघर्षपूर्ण जीवन यात्रा की चर्चा करते हुए बताया कि सिंधु का जन्म 5 जुलाई 1995 को हैदराबाद में हुआ था। वे दो बार ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं ।2016 रियो ओलंपिक में रजत पदक और 2020 टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक हासिल किया। 2019 में वे विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं।

इसके बाद उन्होंने भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा के जीवन पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि नीरज का जन्म 24 दिसंबर 1997 को हरियाणा के पानीपत जिले के खंडरा गांव में हुआ था। उन्होंने 2020 टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। 13 वर्ष की उम्र में भाला फेंकना शुरू किया और कठिन मेहनत व लगन से सफलता प्राप्त की। भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया है।
कार्यक्रम के अंत में श्रीवास्तव ने छात्रों से जीवन में लक्ष्य तय कर उस पर अडिग रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा अगर अर्जुन की तरह चिड़िया की आंख पर लक्ष्य रहेगा, तो सफलता निश्चित है।
