नौतनवां में भगवान परशुराम की मूर्ति स्थापना, प्राण-प्रतिष्ठा कल

उत्तर प्रदेश महाराजगंज

ऐतिहासिक और भव्य होगी भगवान परशुराम की प्राण-प्रतिष्ठा- अनिल त्रिपाठी सचिव परशुराम सेवा समिति नौतनवां

कलयुग के आठ चिरंजीवियों में से एक हैं भगवान परशुराम

उमेश चन्द्र त्रिपाठी

नौतनवां/ महराजगंज: जनपद के नौतनवां नगर में स्थित मां बनैलिया के प्रांगण में बने नवनिर्मित मंदिर में भगवान परशुराम की प्राण-प्रतिष्ठा विधि-विधान से कल होगी। इसके लिए तैयारी पूरी कर ली गई है। भगवान परशुराम को विष्‍णु भगवान का छठवां अवतार माना जाता है। उन्‍हें 8 चिरंजीवी पुरुषों में एक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान परशुराम आज भी इस धरती पर मौजूद हैं।

वैशाख मास की शुक्‍ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान परशुराम का जन्‍म हुआ था। इसी दिन अक्षय तृतीया का भी पर्व मनाया जाता है। ये दिन बेहद शुभ माना गया है। इस दिन को परशुराम जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान परशुराम की पूजा की जाती है।

राम से कैसे बने परशुराम

परशुराम माता रेणुका और ऋषि जमदग्नि के पुत्र हैं। कहा जाता है कि जब वे पैदा हुए तो उनका नाम राम रखा गया था। लेकिन राम महादेव के भक्‍त थे। महादेव ने उनकी भक्ति से प्रसन्‍न होकर उन्‍हें तमाम अस्‍त्र-शस्‍त्र दिए थे। उन्‍हीं में से एक फरसा भी था, जिसे परशु कहा जाता है। परशु को धारण करने के बाद से उन्‍हें परशुराम कहा जाने लगा।

धरती को क्षत्रिय विहीन कर दिया था

भगवान परशुराम जी का जन्म ब्राह्राण कुल में हुआ था। बचपन से ही वे बहुत क्रोधी स्‍वभाव के थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार परशुराम ने अपने माता-पिता के अपमान का बदला लेने के लिए 21 बार इस धरती को क्षत्रिय विहीन कर दिया था।

माता रेणुका का वध

परशुराम अपने पिता के आज्ञाकारी पुत्र थे। एक बार उनके पिता ने उन्‍हें मां का वध करने की आज्ञा दी तो परशुराम ने अपनी माता की जान ले ली। हालांकि बाद में उन्‍होंने अपने पिता से ही वरदान मांगकर मां को दोबारा जीवित करवाया।

भगवान कृष्‍ण को सौंपा सुदर्शन

द्वापरयुग में जब भगवान श्रीकृष्‍ण के रूप में विष्‍णु भगवान ने जन्‍म लिया, तब श्रीकृष्‍ण शिक्षा ग्रहण करने के बाद परशुराम से मिले। तब परशुराम ने ही श्रीकृष्‍ण भगवान को दुष्‍टों और दानवों का वध करने के लिए सुदर्शन चक्र सौंपा था।

आठ चिरंजी‍वियों में से एक

कलयुग के 8 चिरंजीवियों में से एक परशुराम भी हैं। ये आठ चिरंजीवी हैं – परशुराम, महर्षि वेदव्यास, अश्वत्थामा, राजा बलि, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और ऋषि मार्कंडेय कहा जाता है कि सुबह उठकर इनका नाम लेकर इन्‍हें प्रणाम करना चाहिए। इससे निरोगी शरीर और लंबी आयु मिलती है।

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