टॉर्च की रोशनी पड़ते ही भागे, कुछ देर बाद लौटकर लाठी-डंडों से बोला हमला; बाइक में भी की तोड़फोड़
हर्षोदय टाइम्स ब्यूरो
महराजगंज। वन क्षेत्र में रात के समय लकड़ी के बोटे लेकर जा रहे लोगों को रोकना दो वनकर्मियों को भारी पड़ गया। रानीपुर के टोला मछरियहवा के पास गश्त के दौरान टॉर्च की रोशनी पड़ने पर साइकिल छोड़कर भागे लोगों ने कुछ देर बाद वापस लौटकर वनकर्मियों पर हमला कर दिया। मारपीट में एक वनकर्मी के सिर में गंभीर चोट लगने का आरोप है। हमलावरों ने उनकी मोटरसाइकिल भी क्षतिग्रस्त कर दी। घटना के बाद से वन विभाग और पुलिस महकमे में हलचल है।
घटना 25 अगस्त की देर रात करीब एक बजे की बताई जा रही है। पुलिस को दी गई तहरीर के मुताबिक अर्दली मोहन चौहान अपने हमराह दैनिक सुरक्षा श्रमिक/वाचर हरिहर के साथ क्षेत्र में रात्रि गश्त कर रहे थे। इसी दौरान मछरियहवा के पास कुछ लोग साइकिलों पर लकड़ी के बोटे ले जाते दिखाई दिए। वनकर्मियों ने उनकी ओर टॉर्च की रोशनी डाली तो वे साइकिल मौके पर छोड़कर भाग निकले।
तहरीर के अनुसार करीब पांच मिनट बाद वही लोग दोबारा मौके पर पहुंचे और वनकर्मियों से गाली-गलौज करने लगे। देखते ही देखते दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया और आरोपितों ने लाठी-डंडों से वनकर्मियों पर हमला कर दिया। हमले के दौरान मोहन चौहान के सिर में चोट लगी। उन्होंने बचाव के लिए शोर मचाया, जिसके बाद हमलावर मौके से निकल गए। आरोप है कि जाते समय उन्होंने दोबारा रात में जांच करने आने पर जान से मारने की धमकी भी दी।
चार लोगों के खिलाफ मुकदमा, पुलिस ने शुरू की जांच
मामले में मोहन चौहान की तहरीर पर पुलिस ने चार लोगों को नामजद किया है। नामजद आरोपितों में सनी पुत्र रामप्रसाद, धर्मेंद्र पुत्र जितई, छोटू यादव पुत्र परशुराम और निरहू पुत्र नंदराम शामिल हैं। सभी रानीपुर क्षेत्र के अलग-अलग टोलों के निवासी बताए गए हैं।
पुलिस अभिलेख के मुताबिक मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2), 132, 324(4), 351(3) और 352 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। थानाध्यक्ष गौरव राय कन्नौजिया के आदेश पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है।
हमले के पीछे लकड़ी तस्करी का विवाद होने की चर्चा
वहीं, स्थानीय स्तर पर घटना को लेकर एक अलग चर्चा भी सामने आ रही है। कुछ ग्रामीणों का दावा है कि हमले के आरोपित कथित रूप से जंगल से अवैध तरीके से लकड़ी काटकर ले जाने वाले लोगों के समूह से जुड़े हैं। ग्रामीणों के अनुसार पहले कथित तौर पर वनकर्मियों की जानकारी और सहमति से लकड़ी ले जाने की चर्चा क्षेत्र में थी, लेकिन घटना वाली रात वनकर्मियों को सूचना दिए बगैर लकड़ी ले जाने की कोशिश की जा रही थी।
बताया जाता है कि इसकी भनक लगने के बाद वनकर्मी मौके पर पहुंचे और लकड़ी ले जाने से रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान विवाद बढ़ गया और मारपीट की घटना हो गई। हालांकि, वनकर्मियों की कथित मिलीभगत और लकड़ी तस्करी से जुड़े इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
घटना ने रात के समय वन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और अवैध लकड़ी कटान पर निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

