हर्षोदय टाइम्स ब्यूरो
महराजगंज। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को निःशुल्क विशेष पुष्टाहार (टेक होम राशन) उपलब्ध कराया जाता है। इसका उद्देश्य कुपोषण को दूर करना और बच्चों तथा महिलाओं को आवश्यक पोषण प्रदान करना है। इसके तहत विभिन्न प्रकार के प्रीमिक्स, फोर्टीफाइड खाद्य पदार्थ, दलिया, आटा, दाल और सोयाबीन आदि वितरित किए जाते हैं।
हालांकि, हाल के दिनों में कई लाभार्थियों ने वितरित किए जा रहे पुष्टाहार की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए हैं। लाभार्थियों का कहना है कि रंग-बिरंगे पैकेटों में मिलने वाला अनुपूरक पोषण आहार स्वाद और गुणवत्ता के मामले में अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर रहा है। कुछ महिलाओं ने आरोप लगाया कि बच्चों को यह सामग्री पसंद नहीं आती, जिसके कारण वे इसे खाने से कतराते हैं।
आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों का कहना है कि सरकार की योजना का उद्देश्य सराहनीय है, लेकिन यदि पुष्टाहार की गुणवत्ता बेहतर हो तो इसका लाभ अधिक प्रभावी ढंग से लाभार्थियों तक पहुंच सकेगा।
कार्यकर्त्रियों के अनुसार कई बार लाभार्थियों की नाराजगी का सामना उन्हें करना पड़ता है, जबकि वे केवल वितरण का कार्य करती हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित विभाग को समय-समय पर पुष्टाहार की गुणवत्ता की जांच करानी चाहिए और लाभार्थियों की प्रतिक्रिया के आधार पर आवश्यक सुधार करने चाहिए। उनका मानना है कि बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी इस महत्वपूर्ण योजना में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार कुपोषण मुक्ति के लिए लगातार प्रयास कर रही है। ऐसे में लाभार्थियों की शिकायतों और सुझावों पर गंभीरता से विचार कर पुष्टाहार की गुणवत्ता में सुधार किया जाए तो योजना का उद्देश्य और अधिक प्रभावी ढंग से पूरा हो सकेगा।

