हर्षोदय / अर्जुन चौधरी
सिसवा बाजार/महराजगंज। जनपद अंतर्गत विकास खंड सिसवा की ग्राम पंचायत सेमरी में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। जांच में एक ही कार्य के लिए दो बार भुगतान किए जाने की पुष्टि होने पर जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) श्रेया मिश्रा ने ग्राम प्रधान और तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ कुल ₹4,54,220 की रिकवरी का आदेश जारी किया है। प्रशासन की इस कार्रवाई से पंचायत विभाग में हलचल मच गई है।
मामले की जांच ग्राम पंचायत निवासी एवं आरटीआई कार्यकर्ता संतोष त्रिपाठी की शिकायत के आधार पर कराई गई। शिकायत में एएनएम सेंटर के कायाकल्प कार्य तथा सीसी रोड एवं नाली निर्माण में वित्तीय अनियमितता और फर्जी भुगतान का आरोप लगाया गया था। जांच के दौरान अभिलेखों, भुगतान विवरण और कार्यों से संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल में आरोप सही पाए गए।
जांच रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022-23 और 2023-24 में एक ही कार्य के नाम पर दोबारा भुगतान किया गया। एएनएम सेंटर के कायाकल्प कार्य में ₹2.80 लाख की अनियमितता मिली, जबकि रमेशर के खेत से सलामत के घर तक सीसी रोड एवं नाली निर्माण कार्य में ₹1,74,220 का फर्जी भुगतान पाया गया। इस प्रकार कुल ₹4,54,220 के सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि हुई।
डीपीआरओ ने ग्राम प्रधान अमीन अली और तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव विवेकानंद राय से बराबर-बराबर धनराशि वसूलने का निर्देश दिया है।
आदेश के तहत ग्राम प्रधान को ₹2,27,110 ग्राम निधि प्रथम खाते में जमा कराने को कहा गया है। वहीं सचिव विवेकानंद राय का तबादला गोरखपुर जनपद में होने के कारण उनकी रिकवरी सुनिश्चित कराने के लिए गोरखपुर के जिला पंचायत राज अधिकारी को पत्र भेजा गया है।
उधर ग्राम प्रधान अमीन अली ने पूरे प्रकरण में मनरेगा के तकनीकी कर्मचारियों और ठेकेदार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि भुगतान प्रक्रिया में संबंधित कर्मियों और ठेकेदार की मिलीभगत रही। उन्होंने बताया कि धनराशि वापस करने के लिए ठेकेदार ने चेक भी दिया था, लेकिन खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण वह चेक पास नहीं हो सका।
इस मामले के उजागर होने के बाद ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की गुणवत्ता, भुगतान प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होने से ही सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सकेगी।



