समूह ‘क-ख’ में 20% और ‘ग-घ’ में 10% सीमा तय, ऑनलाइन मेरिट सिस्टम से पारदर्शिता पर जोर
महराजगंज। प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बहुप्रतीक्षित स्थानांतरण नीति जारी कर दी है। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल द्वारा जारी शासनादेश के अनुसार सभी विभागों में तबादलों की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से शुरू होकर 31 मई 2026 तक पूर्ण कर ली जाएगी। नई नीति में पारदर्शिता, मेरिट और समयबद्धता को केंद्र में रखा गया है।
नीति के तहत समूह ‘क’ और ‘ख’ के अधिकारियों के तबादले अधिकतम 20 प्रतिशत सीमा के भीतर ही किए जाएंगे, जबकि समूह ‘ग’ और ‘घ’ कर्मचारियों के लिए यह सीमा 10 प्रतिशत निर्धारित की गई है। विशेष परिस्थितियों में विभागीय मंत्री की अनुमति से इसे 20 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकेगा। लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर स्थानांतरित किया जाएगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि एक ही जनपद में तीन वर्ष तथा एक ही मंडल में सात वर्ष पूरे करने वाले अधिकारी तबादले के दायरे में आएंगे। मुख्यालय में तीन वर्ष पूरे करने वालों को भी बाहर भेजा जाएगा। तबादला प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए इस बार मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन और मेरिट आधारित प्रणाली लागू की गई है।
इसके साथ ही आकांक्षी जिलों और विकासखंडों में रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरना अनिवार्य किया गया है। ऐसे क्षेत्रों में तैनाती के बाद दो वर्ष पूरा करने पर कर्मचारियों से विकल्प लिया जाएगा। नीति में मानवीय पहलुओं का भी विशेष ध्यान रखा गया है। पति-पत्नी दोनों के सरकारी सेवा में होने पर एक ही जनपद में तैनाती का प्रयास किया जाएगा।
दिव्यांग कर्मचारियों को सामान्य तबादलों से छूट दी गई है, जबकि गंभीर बीमारी, बच्चों की शिक्षा और अन्य विशेष परिस्थितियों में भी सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। सेवानिवृत्ति से दो वर्ष पूर्व कर्मचारियों को गृह जनपद में तैनाती देने पर भी विचार किया जाएगा।
सरकार ने चेतावनी दी है कि स्थानांतरण आदेश जारी होने के एक सप्ताह के भीतर कार्यभार ग्रहण करना अनिवार्य होगा। आदेश का पालन न करने पर वेतन रोकने के साथ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। इसके अतिरिक्त विभागीय मंत्री विशेष परिस्थितियों में तबादले कर सकेंगे, जबकि आवश्यकता पड़ने पर मुख्यमंत्री स्तर से भी सीधे आदेश जारी किए जा सकते हैं।
मान्यता प्राप्त सेवा संघों के पदाधिकारियों को दो वर्ष तक तबादले से छूट दी गई है, हालांकि भ्रष्टाचार या अनुशासनहीनता के मामलों में यह छूट लागू नहीं होगी। नई नीति के जरिए सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने, पारदर्शिता बढ़ाने और जनहित को प्राथमिकता देने के लिए इस बार तबादलों में सख्ती बरती जाएगी।

