प्रज्ञा पुराण कथा का शुभारंभ, प्रथम खण्ड में देवर्षि नारद के माध्यम से मिला कर्म और आचरण का संदेश

उत्तर प्रदेश महाराजगंज

हर्षोदय टाइम्स/ सुभाष चंद्र पटेल


भिटौली /महराजगंज। श्रीमद् पावन प्रज्ञा पुराण कथा के शुभारंभ अवसर पर युग ऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी द्वारा रचित चार खण्डों में से प्रथम खण्ड का संगीतमय कथा-वाचन श्रद्धा और भाव के साथ संपन्न हुआ। कथा में देवर्षि नारद जी के चरित्र और उनके जीवन-दर्शन को अत्यंत रोचक व प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।


कथा के अनुसार, एक बार देवर्षि नारद जी मृत्यु लोक के भ्रमण पर निकले। उनका उद्देश्य यह जानना था कि पृथ्वी पर रहने वाले लोग जीवन मूल्यों और धर्म को किस हद तक अपने आचरण में उतारते हैं। भ्रमण के दौरान वे एक मंदिर पहुँचे, जहाँ रामचरितमानस की भावपूर्ण कथा मधुर स्वर में चल रही थी। नारद जी भी वहीं बैठकर कथा का रसपान करने लगे।
इसी दौरान कथा वाचक पंडित जी ने अचानक कथा रोककर अपनी पोथी समेटनी शुरू कर दी। यह देखकर नारद जी ने कारण पूछा तो पंडित जी ने बताया कि उन्हें भाई से दो गज जमीन के विवाद में कचहरी जाना है, जहाँ मुकदमे का फैसला होना है।


यह सुनकर देवर्षि नारद जी ने मन ही मन गहरी पीड़ा व्यक्त की और सोचा कि जो व्यक्ति भरत के त्याग, मर्यादा और वैराग्य की कथा सुनाता है, वही स्वयं सांसारिक मोह में फँसकर भाई से विवाद कर रहा है। इस प्रसंग के माध्यम से कथा में यह संदेश दिया गया कि केवल धर्म और सदाचार की बातें करना पर्याप्त नहीं, बल्कि उन्हें अपने जीवन में अपनाना ही सच्ची भक्ति और वास्तविक धर्म है।


कथा श्रवण के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर दिखे और प्रथम खण्ड की कथा ने आत्ममंथन का अवसर प्रदान किया।

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