मिठौरा ब्लॉक के नदुआ गांव में मनरेगा बना फर्जीवाड़े का अड्डा
मिठौरा /महराजगंज : एक ओर सरकार मनरेगा को गरीब मजदूरों के लिए संजीवनी बताती है, तो दूसरी ओर जमीनी हकीकत योजनाओं को खोखला साबित कर रही है। ताजा मामला मिठौरा ब्लॉक के नदुआ गांव का है, जहां मनरेगा के तहत बड़े पैमाने पर फर्जी हाजिरी का गंभीर आरोप सामने आया है।


जानकारी के अनुसार नदुआ गांव में पीडब्ल्यूडी रोड से शंकर टोला होते हुए अवध कुटी तक संपर्क मार्ग पर मनरेगा के अंतर्गत मिट्टी कार्य दर्शाया गया है। लेकिन ग्रामीण मजदूरों का आरोप है कि सिर्फ 10 मजदूरों को मौके पर बुलाकर फोटो खींची गई, जबकि दस मस्टर रोल पर कुल 89 मजदूरों की हाजिरी दर्ज कर दी गई।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दसों मस्टर रोल पर एक ही फोटो अपलोड की गई है। फोटो में केवल महिलाएं दिखाई दे रही हैं, जबकि मस्टर रोल में प्रत्येक पर 4 से 5 पुरुष मजदूरों के नाम भी दर्ज हैं। इससे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीण मजदूरों का कहना है कि जब कागजों में ही 89 मजदूर काम कर रहे हैं, तो असल में जरूरतमंद गरीबों को काम कैसे मिलेगा? फर्जी हाजिरी के चलते उन्हें मजदूरी नहीं मिल रही, जिससे परिवार के भरण-पोषण में गंभीर संकट पैदा हो गया है।
मजदूरों ने चेतावनी दी है कि यदि इस तरह के भ्रष्टाचार पर रोक नहीं लगी, तो मजबूरी में उन्हें दूसरे प्रदेशों में पलायन करना पड़ेगा। उन्होंने भारत सरकार, राज्य सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
इस संबंध में जब मिठौरा ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उनसे संपर्क नहीं हो सका।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस फर्जीवाड़े पर लगाम लगाएगा? या फिर मनरेगा गरीबों की जगह भ्रष्टाचार का साधन बनती रहेगी?

