महराजगंज। भारत-नेपाल सीमा पर फर्जी निर्यात दिखाकर करोड़ों रुपये के जीएसटी रिफंड हड़पने का गोरखधंधा जोर पकड़ता जा रहा है। हाल ही में नौतनवा के गांधी नगर वार्ड और सोनौली में 11 जुलाई को पड़े छापों ने इस बड़े खेल का पर्दाफाश किया। जांच में सामने आया कि कारोबारी नेपाल को निर्यात दिखाकर टैक्स फ्री श्रेणी का लाभ उठाते हैं और फर्जी बिलों व बाउचरों के सहारे राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
लगातार उजागर हो रहे मामलों से विभाग की चिंता बढ़ गई है। वाराणसी से संबद्ध जीएसटी की कई टीमें अब सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा कर संदिग्ध फर्मों के खिलाफ साक्ष्य जुटाने में लगी हैं। विभागीय कार्रवाई से कारोबारी जगत में खलबली मच गई है। जिन फर्मों पर शक है, उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जा रहा है। वहीं, कार्रवाई से बचने के लिए कुछ फर्म मालिक अपने दस्तावेजों में खामियों को दूर करने की जुगत में जुटे हैं।
सूत्र बताते हैं कि नेपाल को निर्यात होने वाला सामान जीएसटी मुक्त श्रेणी में आता है। इसी का फायदा उठाकर कुछ व्यापारी फर्जी निर्यात का खेल खेलते हैं और करोड़ों रुपये का रिफंड हड़प लेते हैं। यह धंधा लंबे समय से चल रहा है, जिससे केंद्र सरकार के खजाने पर सीधा असर पड़ा है।
जीएसटी विभाग की सक्रियता और हालिया छापों ने इस काले कारोबार में शामिल कारोबारियों की नींद उड़ा दी है। विभाग अब संदिग्ध नेटवर्क और उससे जुड़े सप्लायरों की भी गहन जांच कर रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कई और बड़ी फर्में विभाग के शिकंजे में आएंगी।
राजस्व पर डाका डालने वाले इस खेल ने न सिर्फ सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया है बल्कि ईमानदारी से कारोबार करने वाले व्यापारियों के हितों को भी चोट पहुंचाई है। विभाग की यह कार्रवाई अब तय करेगी कि सीमा पर कितना बड़ा गिरोह इस फर्जीवाड़े में शामिल है।
