लापरवाही की हद : कुशीनगर स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है अवैध अस्पतालों का ब्योरा

उत्तर प्रदेश कुशीनगर

  • और न ही इसके लिए आवेदन करने वालों का कोई रिकॉर्ड
  • डीएम ने मेडिकल कॉलेज में दलालों पर पूरी तरह अंकुश लगाने का दिया निर्देश
  • जब फसल का बीमा हो सकता है तो फिर गर्भ में पल रहे बच्चे का क्यों नहीं? : डीएम महेंद्र सिंह तंवर

हर्षोदय टाइम्स ब्यूरो अजय पाठक कुशीनगर


कुशीनगर जिले में इससे बड़ी लापरवाही और क्या होगी कि जिले के स्वास्थ्य विभाग के पास ही वैध-अवैध अस्पतालों का ब्योरा नहीं है और न ही इसके लिए आवेदन करने वालों का कोई रिकॉर्ड। जिला स्वास्थ्य समिति (शासी निकाय) की बैठक में डीएम ने इसका ब्योरा मांगा तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बगले झांकने लगे

इस पर डीएम ने नाराजगी जाहिर की और दस दिन के भीतर इनकी सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। यही नहीं चिकित्सकीय लापरवाही से मरीजों की आए दिन हो रही मौत की घटनाओं पर भी उनका तेवर तल्ख रहा। उन्होंने मेडिकल कॉलेज में दलालों पर पूरी तरह अंकुश लगाने के निर्देश दिए, अन्यथा इस मामले में खुद संबंधित चिकित्सकों और स्टॉफ पर कार्रवाई करने की चेतावनी दी।

जनपद मुख्यालय से लगायत सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के बाजारों तक अवैध अस्पताल संचालित हो रहे हैं। सरकारी हों या निजी अस्पताल, हर जगह मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, जिसकी वजह से अस्पतालों में मरीजों की आए दिन मौत हो रही है। अभी बुधवार को ही चिकित्सकीय लापरवाही की वजह से ही एक गर्भवती महिला, जिसका प्रसव होने वाला था हालत बिगड़ गई थी। मेडिकल कॉलेज के एमसीएच विंग में उसकी तथा गर्भ में पल रहे उसके बच्चे की मौत हो गई थी। पिछले एक पखवारे के भीतर ऐसी कई घटनाएं जिले के विभिन्न अस्पतालों में हो चुकी हैं। मीडिया में लगातार गैर मानक अस्पतालों में सेहत के साथ जिंदगी से भी खिलवाड़ शीर्षक से प्रमुखता से खबर प्रकाशित होने की खबरों का संज्ञान लेते हुए गुरुवार की समीक्षा बैठक में डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने तमकुहीराज में पंजीकृत अस्पतालों के बारे में पूछा कि क्या वहां सिर्फ दो ही अस्पताल पंजीकृत हैं? उन्होंने सीएमओ को निर्देश दिया कि जनपद में संचालित पंजीकृत व अपंजीकृत अस्पताल तथा इनके पंजीकरण के लिए किए गए आवेदन से संबंधित सूची दस दिनों के अंदर प्रस्तुत करें। यह सूची तीनों प्रकार की सीएसचीवाइज संबंधित एमओआईसी की तरफ से तैयार की जाएगी। यदि कोई छूटता है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित एमओआईसी की होगी। उन्होंने कहा भी कि आए दिन अवैध अस्पतालों में किसी न किसी मरीज की मौत की खबरें आती हैं। इस संबंध में विभाग की तरफ से क्या कार्रवाई की जा रही है? उन्होंने सभी अवैध अस्पतालों को चिह्नित करते हुए प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। बैठक में शामिल डॉ. रोहित ने मेडिकल कॉलेज/जिला अस्पताल से रेफर किए जाने वाले मरीजों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने अनुरोध किया कि सब सेंटरों पर डिलीवरी की संख्या में कमी लाना आवश्यक है। क्योंकि सब सेंटर पर हर प्रकार की सुविधा का अभाव है। डीएम ने आभा आईडी बनाने में खराब प्रगति वालों के कार्यों में सुधार लाने के निर्देश दिए। आशा व एएनएम की जो जिम्मेदारी है, वे सभी कार्य पूर्ण होने के बाद ही उनका वेतन जारी करने के निर्देश संबंधित को दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि जब फसल का बीमा हो सकता है तो फिर गर्भ में पल रहे बच्चे का क्यों नहीं? उन्होंने कहा कि आशा द्वारा प्रथम सूचना दिए जाने के बाद ही बीमा हो जाना चाहिए। इस पर होमवर्क होना चाहिए। यदि गाइडलाइन में व्यवस्था नहीं है तो इस संबंध में शासन को पत्र भेजा जाए। बैठक में अन्य सभी बिंदुओं पर चर्चा की गई तथा उस संबंध में डीएम की तरफ से जरुरी निर्देश दिए गए।

कमेटी बनाकर सूची तैयार करने के निर्देश : डीएम महेन्द्र सिंह तंवर

जनपद के चार ब्लॉकों में मैनपॉवर की कमी के दृष्टिगत चिकित्सक, एएनएम तथा स्टॉफ के स्थानांतरण के संबंध में उन्होंने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि कमेटी बनाकर आवश्यकतानुसार सूची फाइनल कर ली जाए। किसी के दबाव में आकर फाइनल सूची में किसी प्रकार का संशोधन नहीं होना चाहिए। इसी प्रकार चिकित्सकों की भर्ती के संबंध में भी आवश्यक दिशानिर्देश दिए गए।

  • दलालों पर अंकुश नहीं लगा तो खुद करूंगा संबंधित डॉक्टर और स्टॉफ पर कार्रवाई : डीएम महेन्द्र सिंह तंवर डीएम ने बैठक में मेडिकल कॉलेज/जिला अस्पताल में हो रहे अल्ट्रासाउंड के संबंध में पूछताछ के बाद निर्देशित किया कि यदि मरीजों/अल्ट्रासाउंड कराने वालों की संख्या अधिक है तो दो शिफ्टों में ड्यूटी कराया जाए। जिला अस्पताल में बिचौलियों/दलालों के संबंध में जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि इन्हें चिह्नित कर प्रभावी कार्रवाई करें। अन्यथा इस कार्य में जो भी चिकित्सक/स्टॉफ सम्मिलित हैं, उनके खिलाफ मेरी ओर से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त प्राइवेट प्रैक्टिस से संबंधित बैठक भी किए जाने के निर्देश दिए गए।

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