बडे़ हर्षउल्लास के साथ मनाया जा रहा है परतावल में दशहरा

उत्तर प्रदेश महाराजगंज

हर्षोदय टाइम्स/ रतन पाण्डेय

परतावल/ महराजगंज: जनपद के नगर पंचायत परतावल में इस बार दुर्गा पूजा को लेकर भव्य आयोजन किया गया है। पंडाल को विशेष रूप से सजाया गया है और यहाँ की सजावट स्थानीय जनता के साथ-साथ दूर-दराज़ से आने वाले भक्तों का भी ध्यान आकर्षित कर रही है।

पंडाल की थीम इस बार पारंपरिक भारतीय संस्कृति और आधुनिक कला के संगम पर आधारित है। माँ दुर्गा की भव्य प्रतिमा के साथ-साथ आसपास की सजावट में भी विशेष ध्यान दिये है। आयोजक समिति ने सुरक्षा और सफ़ाई के प्रबंधों पर भी विशेष ध्यान दिया है ताकि भक्तजन आराम से पूजा-अर्चना कर सकें।

परतावल बाज़ार में चल रहे इस आयोजन में दिन-रात भक्तों की भीड़ लगी हुई है। पूजा पंडाल में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया है, जिसमें स्थानीय लोग खूब शिरकत कर रहे हैइस नवरात्रि में माँ दुर्गा का पंडाल परतावल में बहुत धूमधाम से सजाया गया है। श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है, और भक्तजन माता के दर्शन करने के लिए उमड़ रहे हैं। पंडाल को खास तौर पर भव्य तरीके से सजाया गया है, जिसमें माँ दुर्गा की मूर्ति आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

परतावल


लोगों के बीच भक्तिभाव का माहौल है और नवरात्रि के उत्सव को मनाने के लिए कोई कसर नहीं जाने देना चाहते है यहां के लोग। दुर्गा पूजा पंडालों में देवी दुर्गा की आंखों की पट्टी खोलने की रस्म को “चक्षुदान” कहा जाता है। यह एक बहुत महत्वपूर्ण और पवित्र अनुष्ठान है, जो आमतौर पर महालया के दिन या उससे पहले किया जाता है। जब माता दुर्गा की मूर्ति को स्थापित किया जाता है, तब उनकी आंखों को नहीं खोला जाता। चक्षुदान के समय मूर्तिकार या पुजारी माता दुर्गा की मूर्ति की आंखों को रंग से उकेरते हैं, जिससे उनकी आंखों का दर्शन होता है।

यह अनुष्ठान इस विश्वास के साथ किया जाता है कि माता दुर्गा अब जागृत हो गई हैं और अपनी भक्तों की रक्षा करने के लिए तैयार हैं। परतावल के पंडाल मां दुर्गा के आंख की पट्टी खोलने के बाद, भक्त बड़ी संख्या में पंडालों में माता के दर्शन के लिए उमड़े और पूजा-अर्चना करते रहे। इस समय पर पंडाल में मौजूद पण्डित जी द्वारा पारंपरिक मंत्रों का जाप और आरती किया जा रहा जिससे माहौल भक्ति से परिपूर्ण हो गया।

मां दुर्गा की आंख के पट्टी खुलने के बाद दुर्गा पूजा का विधिवत आरंभ हुआ , जो नवमी और विजयादशमी तक चलता रहेगा जिसके बाद माता जी की विदाई की रस्में संपन्न होती हैं

बताते चले की मां दुर्गा की प्रतिमा बनाने की प्रक्रिया में, मूर्तिकार प्रतिमा की आंखें सबसे अंतिम चरण में बनाते हैं। चक्षुदान के समय, पंडाल के पुजारी मंत्रों का उच्चारण करते हैं और मां दुर्गा की आंखें बनाते हैं। इस रस्म के माध्यम से यह विश्वास किया जाता है कि मां दुर्गा की आत्मा प्रतिमा में प्रवेश करती है और वह जीवित हो जाती है।


हिंदू धर्म में आंखों को आत्मा का द्वार माना जाता है। इसलिए, यह माना जाता है कि जब मां दुर्गा की आंखें बनती हैं, तो उनकी चेतना उस प्रतिमा में प्रवेश करती है। यह दुर्गा पूजा के शुभारंभ का प्रतीक होता है और भक्तों के लिए एक विशेष धार्मिक अनुभव प्रदान करता है।


इस दौरान पंडालों में विशेष भीड़ देखी गई , और भक्त मां दुर्गा की आंखों की पहली झलक पाने के लिए पंडालों में एकत्रित हुऐ। चक्षुदान के बाद ही पंडालों में पूजा विधिवत शुरू हुई,और मां दुर्गा की आरती की किया गया। नगर पंचायत परतावल में कई स्थानों पर इसे एक बड़े उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जहां संगीत, नृत्य और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

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