जनसूचना में ‘झूठ’ का खेल या अभिलेखों में गड़बड़ी? कृषि विभाग पर गंभीर सवाल

उत्तर प्रदेश महाराजगंज

जनसुनवाई की शिकायत पर कार्रवाई का अता-पता नहीं, आरटीआई के जवाब में वाहन नंबर को लेकर भी विवाद;

जिला कृषि अधिकारी की कार्यशैली पर शिकायतकर्ता ने उठाए सवाल

महराजगंज। कृषि विभाग में जनसुनवाई और जनसूचना व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायतकर्ता ने विभागीय कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायत के निस्तारण में वास्तविक जांच के बजाय कागजी खानापूर्ति की गई, जबकि सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में भी कथित तौर पर गलत तथ्य उपलब्ध कराए गए।

शिकायतकर्ता ने जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत संख्या 40018726003487 दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि शिकायत में जांच के नाम पर कथित रूप से धन वसूली का मामला उठाया गया था, लेकिन शिकायत पर अब तक स्पष्ट और संतोषजनक जांच आख्या उपलब्ध नहीं कराई गई। इससे शिकायत के निस्तारण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।


शिकायतकर्ता ने छह जुलाई 2026 को कृषि विभाग से चार बिंदुओं पर जनसूचना मांगी थी। विभाग की ओर से पत्रांक 455 के तहत 10 अगस्त 2026 को जवाब दिया गया। आरोप है कि जवाब में प्रकरण से जुड़े विभाग को अलग विभाग का मामला बताते हुए पल्ला झाड़ लिया गया, जबकि शिकायतकर्ता का दावा है कि संबंधित दोनों विभाग जिला कृषि अधिकारी के पर्यवेक्षण में ही संचालित होते हैं। यहीं से पूरा मामला और पेचीदा हो गया।

शिकायतकर्ता का कहना है कि जिस मामले में विभागीय जवाब दिया गया, उसमें संबंधित जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर शिकायत की वास्तविक जांच किस स्तर पर हुई और जांच की आख्या किस आधार पर तैयार की गई?मामले में सबसे गंभीर सवाल विभागीय वाहनों के विवरण को लेकर उठाया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने विभाग से संबंधित वाहनों की जानकारी मांगी थी। जवाब में वाहन संख्या यूपी-44 जी 1560 बताई गई, जबकि शिकायतकर्ता ने संबंधित वाहन का नंबर यूपी-41 जी 1560 होने का दावा किया है। यदि शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत वाहन संख्या सही है तो सवाल यह है कि विभागीय सूचना में दूसरा नंबर कैसे दर्ज हुआ? क्या विभागीय अभिलेखों में वाहन का गलत विवरण दर्ज है या जनसूचना उपलब्ध कराने में गलती हुई? इसका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।


जनसूचना अधिकार कानून का उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। ऐसे में यदि किसी सरकारी विभाग द्वारा मांगी गई सूचना में गलत तथ्य दिए जाने की पुष्टि होती है तो मामला केवल लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संबंधित अधिकारी की जवाबदेही भी तय हो सकती है।

शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने जिला कृषि अधिकारी शैलेन्द्र प्रताप सिंह पर शिकायतकर्ता ने भ्रष्टाचार एवं गलत सूचना उपलब्ध कराने के आरोप लगाए हैं। ऐसे में अब जिला प्रशासन अथवा विभाग के उच्चाधिकारी यदि शिकायत, जांच आख्या, आरटीआई आवेदन, विभागीय जवाब और वाहन के मूल अभिलेखों का मिलान कराते हैं तो पूरा मामला साफ हो सकता है। सवाल यह है कि कथित तौर पर गलत सूचना देने की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

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