कीटनाशक लाइसेंस पर शिकायत, आरटीआई में टालमटोल समेत मोटी रकम वसूली का आरोप

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जिला कृषि अधिकारी और बड़े बाबू की कार्यप्रणाली पर शिकायतकर्ता ने उठाए सवाल, डीएम से उच्चस्तरीय जांच की मांग


महराजगंज। पनियरा विकासखंड की ग्राम पंचायत कमता बुजुर्ग में पंचम राज्य वित्त आयोग की धनराशि से स्वच्छता सामग्री की खरीद के नाम पर किए गए भुगतान को लेकर शुरू हुई शिकायत अब जिला कृषि विभाग की कार्यप्रणाली तक पहुंच गई है। ग्राम पंचायत विशुनपुरा निवासी शिकायतकर्ता शेषमणि ने जिला कृषि अधिकारी और जिला कृषि रक्षा अधिकारी के स्तर पर शिकायत के निस्तारण तथा सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी में कथित टालमटोल का आरोप लगाया है। उन्होंने जिलाधिकारी से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।


शिकायतकर्ता के अनुसार, ग्राम पंचायत कमता बुजुर्ग में 17 मार्च 2025 को ‘पूर्वांचल ट्रेडर्स’ नामक फर्म को स्वच्छता सामग्री की खरीद के नाम पर 39,880 रुपये का भुगतान किया गया। उनके मुताबिक, संबंधित अभिलेखों में खरपतवारनाशक और एंटी-लार्वा दवा की खरीद दर्शाई गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित फर्म के पास कीटनाशक बिक्री का वैध लाइसेंस नहीं था। इसी को लेकर उन्होंने आईजीआरएस के माध्यम से शिकायत की थी।


जिला कृषि रक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से 12 मार्च 2026 को जारी पत्र में शिकायतकर्ता को बताया गया कि मामले की जांच अपर जिला कृषि रक्षा अधिकारी से कराई जा रही है और जांच रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पत्र में शिकायत के निस्तारण का भी उल्लेख है। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि यदि जांच उस समय लंबित थी तो शिकायत का निस्तारण किस आधार पर किया गया।


इसके बाद शिकायतकर्ता ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत चार बिंदुओं पर जानकारी मांगी। 10 अगस्त 2026 को जिला कृषि अधिकारी कार्यालय की ओर से दिए गए जवाब में आईजीआरएस संख्या 40018726003487 को जिला कृषि रक्षा अधिकारी कार्यालय से संबंधित बताते हुए संबंधित कार्यालय में शिकायत करने की बात कही गई। शिकायतकर्ता ने इस जवाब को मांगी गई सूचना उपलब्ध कराने के बजाय जिम्मेदारी दूसरे कार्यालय पर डालने का प्रयास बताया है।


शिकायतकर्ता का कहना है कि जिला कृषि अधिकारी और जिला कृषि रक्षा अधिकारी का प्रभार एक ही अधिकारी के पास होने के बावजूद शिकायत और आरटीआई के मामले में अलग-अलग कार्यालयों का हवाला देकर जानकारी देने से बचने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने विभागीय कार्यालय में तैनात बड़े बाबू की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।


शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि शिकायतों के निस्तारण के नाम पर संबंधित लोगों से कथित तौर पर मोटी रकम वसूले जाने का खेल चल रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने जिला कृषि अधिकारी कार्यालय में तैनात बड़े बाबू के चैंबर में काले शीशे लगाए जाने पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।


शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से पूर्वांचल ट्रेडर्स के कीटनाशक लाइसेंस, ग्राम पंचायत की ओर से किए गए भुगतान, बिल-बाउचर, खरीद संबंधी अभिलेख, शिकायतों के निस्तारण और आरटीआई के जवाब की जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने जांच पूरी होने तक संबंधित अभिलेखों को सुरक्षित रखने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की है।


अब देखना होगा कि जिलाधिकारी स्तर से लगाए गए आरोपों की जांच किस अधिकारी या टीम से कराई जाती है। जांच में यदि अभिलेखों और मौके के सत्यापन के दौरान कोई अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।

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