सोहगी बरवा की वन सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, अवैध कटान बढ़ने का ग्रामीणों ने लगाया आरोप

उत्तर प्रदेश महाराजगंज



महराजगंज। सोहगी बरवा वन्यजीव प्रभाग की वन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर क्षेत्र में एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय ग्रामीणों और वन विभाग को गोपनीय सूचनाएं देने वाले कुछ लोगों का आरोप है कि सीमित संसाधनों और कम मानव बल के कारण वन सुरक्षा व्यवस्था प्रभावी ढंग से संचालित नहीं हो पा रही है। उनका कहना है कि इसका लाभ उठाकर वन माफिया जंगलों और आसपास के क्षेत्रों में अवैध लकड़ी कटान एवं तस्करी की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।


ग्रामीणों के अनुसार वर्तमान में वन सुरक्षा टीम में डिप्टी रेंजर एवं सुरक्षा अधिकारी काशीम अली के साथ राजेश यादव और सोनू सहित केवल तीन कर्मियों के भरोसे व्यवस्था संचालित होने की बात कही जाती है। उनका आरोप है कि पहले की तुलना में टीम की सक्रियता कम होने से अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं रह गया है।


वन विभाग को गोपनीय सूचनाएं उपलब्ध कराने वाले कुछ लोगों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि कई बार अवैध कटान की सूचना संबंधित अधिकारियों और सुरक्षा टीम को दी गई, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं होने से निराशा हाथ लगी। उनका कहना है कि सूचना देने के बावजूद कार्रवाई न होने से मुखबिरों का मनोबल प्रभावित होता है और भविष्य में सूचना देने की प्रवृत्ति भी कमजोर पड़ सकती है।


ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि सोहगी बरवा वन्यजीव प्रभाग के विभिन्न रेंज क्षेत्रों तथा जंगल से सटे गांवों में बिना वैध अनुमति के लकड़ी कटान और परिवहन की घटनाएं बढ़ी हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।


क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि पहले वन सुरक्षा टीम की नियमित गश्त और त्वरित कार्रवाई के कारण वन माफियाओं में कार्रवाई का भय बना रहता था, जिससे अवैध कटान पर काफी हद तक अंकुश था। लेकिन वर्तमान में टीम की कथित निष्क्रियता की चर्चाओं से अवैध कटान में संलिप्त लोगों के हौसले बढ़ने की बात कही जा रही है।


ग्रामीणों ने वन विभाग के उच्च अधिकारियों से वन सुरक्षा टीम को पर्याप्त मानवबल, वाहन और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि जंगलों की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित हो सके और वन संपदा की सुरक्षा की जा सके।



इस संबंध में सोहगी बरवा वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी राजेंद्र निरंजन सुर्वे से फोन पर संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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