‘योगी की पाती’ में पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश, जन्मदिन, बेटी की विदाई और मांगलिक आयोजनों पर पौधारोपण का किया आह्वान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने का आह्वान करते हुए कहा है कि आज पर्यावरण असंतुलन, बढ़ते कार्बन उत्सर्जन, वनों के क्षरण और जैव विविधता के लगातार हो रहे ह्रास जैसी गंभीर वैश्विक चुनौतियों का सबसे प्रभावी और स्थायी समाधान वृक्ष हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वृक्षारोपण को केवल सरकारी अभियान तक सीमित न रखकर इसे अपने जीवन के संस्कारों, परंपराओं और पारिवारिक उत्सवों का अभिन्न हिस्सा बनाएं।
मुख्यमंत्री ने अपनी ‘योगी की पाती’ के माध्यम से कहा कि प्रत्येक परिवार को बच्चों के जन्मदिन जैसे विशेष अवसरों पर उनके हाथों एक पौधा अवश्य लगवाना चाहिए, ताकि बचपन से ही प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का भाव विकसित हो सके। उन्होंने कहा कि जब कोई बेटी अपने नए जीवन की शुरुआत के लिए विदा हो, तब वह अपने मायके की स्मृतियों, स्नेह और अपनत्व के प्रतीक के रूप में एक पौधा अवश्य रोपित करे। यह पौधा वर्षों तक परिवार और प्रकृति के बीच भावनात्मक संबंध का प्रतीक बना रहेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि विवाह, गृह प्रवेश, जन्मोत्सव, वर्षगांठ, धार्मिक एवं अन्य मांगलिक आयोजनों जैसे सभी शुभ अवसरों को वृक्षारोपण से जोड़ना समय की आवश्यकता है। यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों पर एक-एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल का संकल्प ले, तो प्रदेश में हरित क्षेत्र तेजी से बढ़ेगा और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिलेगी।
उन्होंने कहा कि आज लगाया गया प्रत्येक पौधा भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्वच्छ वातावरण, शुद्ध वायु, सुरक्षित जलवायु और समृद्ध प्राकृतिक धरोहर का आधार बनेगा। वृक्ष केवल पर्यावरण की रक्षा ही नहीं करते, बल्कि मानव जीवन, वन्य जीवों और जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए हर नागरिक का यह दायित्व है कि वह अधिक से अधिक वृक्ष लगाए और उनके संरक्षण का भी संकल्प ले।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही उत्तर प्रदेश को अधिक हरित, सुरक्षित और समृद्ध बनाया जा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि वृक्षारोपण को सामाजिक परंपरा और जनभागीदारी का रूप दिया जाए, तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, स्वस्थ और संतुलित पर्यावरण प्रदान किया जा सकेगा।


