ग्रामीणों ने वित्तीय अनियमितता की जताई आशंका, अभिलेखों की जांच की मांग
हर्षोदय टाइम्स ब्यूरो महराजगंज
महराजगंज। विकास खंड मिठौरा की ग्राम पंचायत मधुवनी में पंचायत निधि से कराए गए विकास कार्यों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। राज्य वित्त आयोग की धनराशि से हुए इंटरलॉकिंग निर्माण कार्य के भुगतान पर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत स्तर पर कराए गए निर्माण कार्य में सामग्री आपूर्ति के नाम पर जिस निजी फर्म को भुगतान किया गया, उसकी भूमिका और क्षमता को लेकर कई तरह की शंकाएं पैदा हो रही हैं। ग्रामीणों के अनुसार सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध अभिलेखों में आरआरसी सेंटर के सामने इंटरलॉकिंग निर्माण कार्य के लिए करीब एक लाख रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख है, जबकि भुगतान से संबंधित दस्तावेजों में दर्शाई गई राशि और खर्च के विवरण में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है।
आरोप है कि भुगतान के समर्थन में लगाए गए बिलों में दर्ज रकम और सरकारी पोर्टल पर प्रदर्शित व्यय राशि मेल नहीं खा रही है। इसी विसंगति को आधार बनाकर ग्रामीणों ने पूरे भुगतान प्रक्रिया की जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि निर्माण सामग्री की आपूर्ति वास्तव में हुई है तो उसके परिवहन, भंडारण और उपयोग से जुड़े अभिलेख सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया है कि संबंधित फर्म के पास निर्माण सामग्री उत्पादन अथवा आपूर्ति से जुड़े पर्याप्त संसाधन हैं या नहीं, इसकी भी जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि पंचायत निधि का प्रत्येक भुगतान पारदर्शी और नियमसम्मत होना चाहिए, ताकि सरकारी धन के उपयोग पर किसी प्रकार का संदेह न रहे।
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि भुगतान संबंधी अभिलेख, माप पुस्तिका, जीएसटी दस्तावेज, सामग्री आपूर्ति रिकॉर्ड और कार्य की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
हालांकि, समाचार लिखे जाने तक संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आ सका था। अब लोगों की निगाहें प्रशासनिक जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हुई हैं।



