यदि पर्यटन स्थल के रूप में विकास हुआ तो महाराजगंज को विश्व में पहचान दिला सकता है रामग्राम
हर्षोदय टाइम्स/विवेक कुमार पाण्डेय
महाराजगंज:रामग्राम एक प्राचीन और ऐतिहासिक स्थल है जो भारत और नेपाल की सीमा के पास स्थित है। यह बुद्ध से जुड़ा हुआ है और यहाँ बौद्ध धर्म के कुछ महत्वपूर्ण अवशेष पाए जाते हैं। रामग्राम का इतिहास गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़ा है और यह क्षेत्र शाक्यों और कोलियों के बीच विवाद का भी केंद्र रहा है।
रामग्राम का इतिहास:जब गौतम बुद्ध का निर्वाण हुआ तो उनकी अस्थियों को आठ भागों में विभाजित किया गया था। इन अवशेषों में से एक भाग रामग्राम में रखा गया था, जहाँ पर एक बड़ा स्तूप बनाया गया था।
रामग्राम कोलिय राज्य की राजधानी थी और यहां के लोग कोलिय थे। बौद्ध धर्म में कोलियों का महत्वपूर्ण योगदान था। शाक्यों और कोलियों के बीच विवाह संबंध भी थे। सम्राट अशोक ने रामग्राम के स्तूप को खोला और अवशेषों को अन्य स्तूपों में स्थानांतरित करने का प्रयास किया, लेकिन स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया।
बौद्ध धर्म का केंद्र: रामग्राम बौद्ध धर्म के प्रचार और प्रसार का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। यहाँ के स्तूप और अन्य अवशेष बुद्ध के जीवन से जुड़े हुए हैं. आज रामग्राम एक महत्वपूर्ण पर्यटक स्थल है और यहाँ बौद्ध धर्म के अनुयायी आते हैं.
रामग्राम का इतिहास बुद्ध के जीवन और बौद्ध धर्म के विकास से जुड़ा हुआ है। यह स्थान बुद्ध के अनुयायियों के लिए और इतिहास प्रेमियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है.
अगर सरकार इस प्राचीनकालीन स्थान को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करती है तो आने वाले समय में महाराजगंज जिला विश्व पटल पर अपनी एक अलग पहचान बना सकता है इसमें कोई भी संदेह नहीं है परन्तु अभी स्थिति बहुत ही खराब है कीचड़युक्त कच्चे रास्ते आने वाले सैलानियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है आए दिन लोग दुर्घटना के शिकार हो रहे है|
