• सूचना के बाद भी कार्रवाई नहीं, परमीट की आड़ में चल रहा खेल? विभागीय मिलीभगत की आशंका गहराई
महराजगंज। सोहगी वरवा वन्यजीव प्रभाग के अंतर्गत आने वाले दक्षिणी चौक वन रेंज क्षेत्र में इन दिनों सागौन की अवैध कटान और चिरान का मामला तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। जंगलों व ग्रामीण इलाकों से कीमती लकड़ियों को काटकर बाइकों के जरिए नाथनगर एवं आसपास के ग्राम पंचायत क्षेत्रों में स्थित आरा मशीनों तक पहुंचाया जा रहा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक यह अवैध कारोबार लंबे समय से संचालित हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होने से सवाल खड़े हो रहे हैं। मंगलवार की शाम करीब तीन से चार बजे के बीच एक बाइक सवार को ग्राम पंचायत रेहाव-सोनरा मार्ग से दो बोटा सागौन की लकड़ी लेकर तेज गति से सोनरा स्थित एक आरा मशीन की ओर जाते देखा गया।
मामले की सूचना मुखबिर द्वारा वन विभाग को दी गई, लेकिन मौके पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। बाद में वन विभाग की टीम ने संबंधित आरा मशीन पर जांच की, जहां सुरक्षा कर्मी राजेश यादव ने लकड़ी मिलने की पुष्टि करते हुए उसे परमीट युक्त बताया।
हालांकि, इस दावे के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि लकड़ी पूरी तरह वैध थी, तो उसे इस तरह बाइकों से छिपाकर ले जाने की आवश्यकता क्यों पड़ी? आमतौर पर परमीट वाली लकड़ी का परिवहन निर्धारित नियमों के तहत अधिकृत वाहनों से किया जाता है। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं हो सका कि परमीट में दर्ज अन्य लकड़ियों का परिवहन कैसे और कहां किया गया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस पूरे मामले में वन विभाग के कुछ अधिकारियों और आरा मशीन संचालकों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि परमीट की आड़ में अवैध कटान को वैध दिखाकर बड़े स्तर पर लकड़ी का कारोबार किया जा रहा है।
विभागीय अधिकारियों की ओर से स्पष्ट जवाब न मिलने से संदेह और गहराता जा रहा है। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से वन संपदा की सुरक्षा के दावे भी सवालों के घेरे में हैं।
अब देखना यह होगा कि विभाग इस प्रकरण को गंभीरता से लेकर निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करता है या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा। स्थानीय लोगों ने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

