विवेचना के दौरान तस्करों का नाम निकालने की साजिश रचने वाले दरोगा को एसपी ने किया निलंबित

उत्तर प्रदेश महाराजगंज

तस्करों के साथ मिलकर कर रहा था बड़ा खेल

उमेश चन्द्र त्रिपाठी

महराजगंज (हर्षोदय टाइम्स): ! भारत-नेपाल सीमा पर तस्करों द्वारा एसएसबी जवानों के साथ किए गए जानलेवा हमले और तीखी झड़प के मामले में बीते दिनों केस दर्ज किया गया था। जिसकी विवेचना बहुआर चौकी प्रभारी नीरज कुमार को सौंपा गया था। विवेचना में लापरवाही बरतने पर पुलिस अधीक्षक सोमेंद्र मीणा ने बहुआर चौकी प्रभारी नीरज कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। पुलिस अधीक्षक की इस कार्रवाई से मुहकमें में हड़कंप मचा हुआ है।

बता दें कि निचलौल थाना क्षेत्र से जुड़े नेपाल बॉर्डर के समीप दो माह पूर्व लगभग 50 की संख्या में तस्करों ने एसएसबी जवानों पर जानलेवा हमला और तीखी झड़प कर लिया था। जिसमें एसएसबी के एक इंस्पेक्टर की हाथ के पंजे की हड्डी टूट गई थी। इस मामले में निचलौल थाने में तस्करों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा भी दर्ज हुआ था। उस केस की विवेचना बहुआर चौकी प्रभारी नीरज कुमार को सौंपी गई थी। आरोप है कि विवेचना के दौरान ने एक बड़ा खेल शुरू कर दिया और कुछ तस्करों का नाम केस से निकालने का प्रयास करने लगे। मामला संज्ञान में आने के बाद पुलिस अधीक्षक ने जांच कराई। इसके बाद  बहुआर चौकी प्रभारी नीरज कुमार को निलंबित कर दिया।

बता दें कि बीते 18 जुलाई 2024 को जनपद से सटे भारत-नेपाल सीमा पर तस्करों ने एसएसबी जवानों की पेट्रोलिंग पार्टी हमला कर कई जवानों को घायल कर माल समेत फरार हो गए। हमले में एक इंस्पेक्टर के हाथ भी फ्रैक्चर हो गया था। घटना के बाद पुलिस मामले की जांच में जुटी थी। तस्करों ने एक बार फिर दुस्साहस दिखाया था और एसएसबी जवानों से भिड़ गए थे। यह तब हुआ जब एसएसबी जवान सीमा पर पेट्रोलिंग कर रहे थे। इसी दौरान तस्करों ने एसएसबी जवानों के बोलेरो पर हमला बोल दिया। काफी मशक्कत के बाद भी एसएसबी जवान चाइनीज नाशपाती लदा पिकअप नहीं पकड़ पाए।

यहां तक कि तस्करों ने इंस्पेक्टर सीडी मुकेश कुमार का हाथ भी तोड़ दिया था। सरहद की सुरक्षा करने वाली एसएसबी को ही अब अपनी सुरक्षा के लिए यूपी पुलिस से गुहार लगानी पड़ रही है। इसके बावजूद भी इस मामले की विवेचना कर रहा पुलिस का दरोगा तस्करों को बचाने के लिए सुनियोजित तरीके से एक गहरी साजिश कर रहा था। अब जरा सोचिए जब सेना के जवान ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम जनता कैसे सुरक्षित रहेगी। पूरा मामला क्या है चलिए वो भी बता देते हैं।

मालूम हो  कि झुलनीपुर बीओपी कैंप क्षेत्र ग्राम सभा करमिशवा से चाइनीज नाशपाती की तस्करी हो रही थी। इसकी सूचना मिलने पर छापेमारी के लिए एसएसबी जवानों की एक टीम मौके पर पहुंची। यहां पुलिस टीम को देखते ही तस्कर भड़क गए और बोलेरो पर हमला बोल दिया। बोलेरो को छतिग्रस्त कर और कई जवानों को घायल करके तस्कर नेपाल भाग गए। इस मामले में बहुआर चौकी प्रभारी नीरज कुमार ने बताया था कि एसएसबी की तरफ से एक तहरीर दी गई है। हम मामले की जांच में जुटे हैं।

बता दें कि पिछले साल तस्करों ने एसएसबी का अस्थाई कैंप तक फूंक दिया था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर तस्करों के आगे एसएसबी या पुलिस इतनी बेबस क्यों है? क्या जवानों को किसी ने कार्यवाही के लिए रोक रखा है या फिर तस्कर ही इतने मजबूत हो गए हैं कि हर बार वे एसएसबी जवानों और पुलिस कर्मियों को पटखनी दे रहे है। इतना ही नहीं आज तक पुलिस ने न तो किसी पर गैंगेस्टर लगाया और न ही उनके घरों पर बुल्डोजर चलवाया। आज यह मामला छोटा जरूर लग रहा है पर आने वाले दिनों यही तस्कर सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस पर भारी पड़ेंगे। तब सभी को पछताना पड़ेगा।

वैसे तो भारत-नेपाल सीमा पर यूपी से लेकर बिहार तक सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। तस्करों ने सीमा पर ऐसा जाल बिछा रखा है कि वहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता।

सूत्रों बताते हैं कि एसएसबी और पुलिस के कई अधिकारी भी इन तस्कर गिरोह से मिले हुए हैं। सरहद पर एसएसबी जवानों और पुलिसकर्मियों पर हमला कोई पहला मामला नहीं है इससे पहले भी तस्करों ने एसएसबी जवानों और पुलिस पर दर्जनों बार हमला किया है। सीमा पर अगर तस्करों द्वारा सुरक्षा एजेंसियों पर हमला हो रहा है इसे आतंकी हमले से कम नहीं आंका जा सकता है। सीमा पर तैनात वरिष्ठ अधिकारी आखिर आंखें मूंदकर क्यों बैठे हैं यह एक यक्ष प्रश्न है? अगर इन तस्करों पर शीघ्र लगाम नहीं लगाया गया तो आने वाले दिनों में किसी बड़ी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

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