29 डिसमिल ग्रामसभा भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप, ग्रामीण बोले कार्रवाई के बजाय कराया जा रहा समझौता
सदर ब्लाक के ग्राम पंचायत परासखाड
में छावर एवं अतिरिक्त भूमि सहित अन्य भूमि का मामला
हर्षोदय टाइम्स ब्यूरो
महराजगंज। सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत परासखाड़ में ग्रामसभा की भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि करीब 29 डिसमिल सार्वजनिक भूमि पर वर्षों से कब्जा बना हुआ है, लेकिन प्रशासनिक निर्देशों के बावजूद अतिक्रमण हटाने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। उल्टे मौके पर पहुंची राजस्व टीम के रवैये को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार ग्रामसभा की छवर श्रेणी की लगभग 19 डिसमिल भूमि, अतिरिक्त 10 डिसमिल भूमि समेत अन्य सार्वजनिक जमीन पर कुछ लोगों ने लंबे समय से कब्जा कर रखा है। इस संबंध में गांव निवासी अम्बिका पुत्र गणेश सहित करीब एक दर्जन ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की थी।
शिकायत में कहा गया कि आराजी संख्या 602, रकबा 0.040 हेक्टेयर, जो राजस्व अभिलेखों में ग्रामसभा के नाम दर्ज है, उस पर कथित रूप से गांव के कुछ लोगों द्वारा अवैध कब्जा कर निजी उपयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि सार्वजनिक भूमि पर निर्माण और अन्य गतिविधियां संचालित होने से ग्रामसभा के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर सदर एसडीएम ने राजस्व विभाग की पांच सदस्यीय टीम गठित कर पैमाइश कराने और अतिक्रमण मिलने पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। हालांकि शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि टीम के मौके पर पहुंचने के बाद कार्रवाई के बजाय कथित कब्जाधारियों के साथ स्थानीय दुकान पर बैठकर बातचीत और चाय पी गई, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी फैल गई।
ग्रामीणों का कहना है कि पैमाइश भी केवल औपचारिकता बनकर रह गई और इसके बाद मामले को समाप्त करने के लिए सुलहनामा तैयार कराने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उन पर समझौते का दबाव बनाया गया, लेकिन उन्होंने किसी भी सुलह पत्र पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया।
ग्रामीणों ने अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और ग्रामसभा की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए दोबारा सदर एसडीएम से मिलने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो गांव की अन्य सार्वजनिक भूमि पर भी अतिक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा यदि ग्रामसभा की भूमि पर अवैध कब्जा पाया जाता है तो दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करते हुए सार्वजनिक भूमि को तत्काल कब्जामुक्त कराया जाए।

