हर्षोदय टाइम्स ब्यूरो
महराजगंज, 20 फरवरी 2026। भारत और नेपाल की साझा सांस्कृतिक विरासत को समर्पित भारत- नेपाल मैत्री महोत्सव का भव्य आयोजन जनपद मुख्यालय स्थित जवाहर लाल नेहरू स्मारक पी. जी. कॉलेज, महराजगंज परिसर में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। संस्कृति एवं पर्यटन विभाग, उत्तर प्रदेश तथा जिला प्रशासन महराजगंज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव ने दोनों देशों के ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को सुदृढ़ करने का प्रभावशाली संदेश दिया। कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों, विद्यार्थियों और कला प्रेमियों की उल्लेखनीय सहभागिता रही।
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर सांसद प्रतिनिधि कृष्ण गोपाल जयसवाल ने कहा कि भारत और नेपाल का संबंध केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और पारिवारिक आत्मीयता से जुड़ा हुआ है। उन्होंने ऐसे आयोजनों को दोनों देशों के बीच विश्वास, सहयोग और मैत्री को नई ऊंचाई देने वाला बताया।
इस अवसर पर डिप्टी सीएमओ डॉ. के.पी. सिंह, तहसीलदार सदर पंकज साही, नायब तहसीलदार देश दीपक त्रिपाठी तथा नगर पालिका परिषद के पूर्व अध्यक्ष डॉ. बलराम भट्ट सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।

सायं छह बजे सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ जादूगर रामेश्वर गुप्ता के रोमांचक प्रदर्शन से हुआ, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। नेपाल से आई सांस्कृतिक टीम द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक कुमारी नृत्य एवं लोक गायन ने सीमाओं से परे सांस्कृतिक एकता का सशक्त संदेश दिया। इसके अतिरिक्त नीरजा श्रीवास्तव, प्रिया बाजपेयी, शैलजा भारती, अंजलि पाठक ‘अंजल’, बसंत मिश्रा और राकेश चंद्र श्रीवास्तव ने लोक गायन व नृत्य प्रस्तुत कर समां बांध दिया। मथुरा से आए दीपक शर्मा ने होली, मयूर एवं चरकुला नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी, जबकि मुंबई से आए ओम प्रकाश के भजन गायन ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
महोत्सव के अंतर्गत आयोजित विद्यालय स्तरीय निबंध एवं चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को मंच से सम्मानित किया गया। आयोजकों ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारत-नेपाल मैत्री के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आयामों से जोड़ना है। कार्यक्रम के समापन पर आयोजन समिति ने सभी अतिथियों, कलाकारों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे जनपद के लिए एक स्मरणीय सांस्कृतिक अवसर बताया।
भारत-नेपाल मैत्री महोत्सव ने यह सिद्ध किया कि संस्कृति ही वह सेतु है, जो सीमाओं से परे दिलों को जोड़ती है।


